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दानिश सिद्दीकी हत्या मामला: मां-बाप ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में तालिबान के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत, आतंकियों ने ली थी जान

Tue, 22 Mar 2022 04:56 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दानिश सिद्दीकी कंधार शहर के स्पिन बोल्डक जिले में अफगान सैनिकों और तालिबान के बीच हुई झड़पों को कवर कर रहे थे। इसी दौरान तालिबान ने उन्हें निशाना बनाया। 
 
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दानिश सिद्दीकी - फोटो : Twitter
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विस्तार
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अफगानिस्तान में मारे गए पुलित्जर विजेता फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी के परिवार ने उनकी हत्या की जांच करने और तालिबान के कमांडरों और नेताओं सहित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में शिकायत दर्ज कराई है। परिवार के वकील अवि सिंह ने यह जानकारी दी है। 38 वर्षीय सिद्दीकी की पिछले साल 16 जुलाई को अफगानिस्तान में काम के दौरान हत्या कर दी गई थी। सिद्दीकी कंधार शहर के स्पिन बोल्डक जिले में अफगान सैनिकों और तालिबान के बीच हुई झड़पों को कवर कर रहे थे। 

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प्रधानमंत्री मोहम्मद हसन अखुंद और उप-प्रधानमंत्री अब्दुल गनी बरादर के खिलाफ शिकायत
एक संवाददाता सम्मेलन में सिंह ने कहा कि औपचारिक शिकायत तालिबान कमांडरों के खिलाफ भेज दी गई है, जिसमें अफगानिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री मोहम्मद हसन अखुंद और कार्यवाहक प्रथम उप-प्रधानमंत्री अब्दुल गनी बरादर शामिल हैं। सिंह ने कहा कि वे इस मामले में भारत सरकार से भी मदद मांगेंगे। उन्होंने कहा कि हमने पुलित्जर पुरस्कार विजेता फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की हत्या के संदर्भ में 16 जुलाई को और लगभग 16 जुलाई को युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों की स्थिति के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) के समक्ष एक शिकायत दर्ज कराई है। 

वकील ने कहा कि दानिश के माता-पिता अख्तर सिद्दीकी और शाहिदा अख्तर की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई है। सिंह ने दावा किया कि दानिश को गैरकानूनी तरीके से इसलिए मारा गया क्योंकि वह एक पत्रकार और भारतीय थे। उन्होंने कहा कि 16 जुलाई को एक हमले में पत्रकार के घायल होने के बाद जो हुआ उसके बारे में पर्याप्त स्वतंत्र स्रोत हैं, जहां वह रॉयटर्स के एक असाइनमेंट पर काम कर रहे थे। 
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उन्हें इलाज के लिए एक मस्जिद में ले जाया गया था और मस्जिद के ऐतिहासिक रूप से एक अंतरराष्ट्रीय शरण स्थल होने के बावजूद तालिबान ने उस पर हमला किया था। दानिश की बहुत स्पष्ट पहचान थी कि वह प्रेस से थे। उसके पास उनका पासपोर्ट था और वह कोई लड़ाका नहीं थे।
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