राजस्थान में बसपा का दामन छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए छह विधायकों की बयानबाजी से प्रदेश की सियासत गरमाई हुई है। चार साल पहले सीएम अशोक गहलोत के संकटमोचक रहे ये विधायक अब उन्हीं के लिए टेंशन बनते जा रहे हैं। कैबिनेट फेरबदल की अटकलों के बीच ये विधायक सीएम को उनके पुराने वादे याद दिला रहे हैं। सरकार बचाने और राज्यसभा चुनाव जिताने के बदले अपना गिफ्ट मांग रहे हैं। हालांकि इस पर सीएम का कहना है, इन विधायकों के क्षेत्रों में कामों को लेकर कई वादे हुए थे। इनमें से कुछ काम अभी नहीं हुए हैं। अब ये लोग मुझे अपने काम याद दिला रहे हैं तो क्या गलत है। फिलहाल ये लोग कहीं नहीं जा रहे हैं, वे हमारे साथ हैं और हमने मैजिक नंबर हासिल कर लिया है।
राजस्थान की कांग्रेस सरकार में एक बार फिर कैबिनेट फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो चली है। विधानसभा चुनावों से पहले होने वाले इस अंतिम कैबिनेट फेरबदल में बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायक भी अपने लिए जगह की मांग करते हुए नजर आ रहे हैं। ऐसे में यह विधायक लगातार सरकार के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। हाल ही में मंत्री राजेंद्र गुढ़ा के बाद विधायक वाजिब अली ने भी सीएम अशोक गहलोत को निशाने पर लिया है। भरतपुर नगर विधायक अली ने दो टूक कहा कि काम करना तो दूर, मंत्री हमसे मिलते तक नहीं हैं। कई ऐसे मंत्री हैं जिनके विभागों में काम ही नहीं होता है। इस सरकार के मंत्रियों का रवैया ऐसा है जैसे जिंदगीभर के लिए ये मंत्री बन गए हैं। वाजिब अली से पहले सैनिक कल्याण मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने मंत्री शांति धारीवाल को निशाने पर लिया था।
अमर उजाला से चर्चा में राजस्थान कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि 2018 के बाद से गहलोत सरकार पर आए हर संकट में इन विधायकों ने सीएम गहलोत का साथ दिया है। लेकिन अब ये लोग सरकार के साथ संगठन में भी पद देने की मांग कर रहे हैं। इन विधायकों को संगठन के कामों में तरजीह देना गलत है। इससे इन विधायकों के क्षेत्रों से आने वाले कांग्रेसी नेताओं का राजनीतिक भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। सीएम गहलोत ने विधायकों को साथ रखने के लिए मंत्रालयों और आयोगों में पद तो दिया लेकिन संगठन में तो मूल रूप से कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को ही जगह मिलनी चाहिए।
दरअसल, राजस्थान में पायलट और गहलोत विवाद के समय बहुजन समाज पार्टी के इन्हीं छह विधायकों ने सीएम अशोक गहलोत के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाई थी। इस दौरान सीएम ने भी उन्हें अपने मुसीबत का साथी कहा था। उस वक्त सीएम ने कहा था कि जब कांग्रेस की 99 सीटें आई थीं, तब बसपा विधायकों ने कांग्रेस क्यों ज्वाइन की थी। वजह यह थी कि वे राज्य में स्थायी सरकार और मजबूत सरकार चाहते हैं। अब सीएम गहलोत ने कहा कि सरकार के संकट के समय या बसपा के कांग्रेस में विलय के वक्त विधायकों के साथ उनके इलाकों में काम को लेकर कई वादे हुए थे। इनमें से कुछ काम अभी नहीं हुए हैं। अब इस वक्त जब वे अपने काम मुझे याद दिला रहे हैं तो क्या गलत है। फिलहाल ये लोग कहीं नहीं जा रहे हैं, वो हमारे साथ हैं और हमने मैजिक नंबर हासिल कर लिया।