सीबीआई ने मुंबई के जूम डेवलपर्स के खिलाफ 558.16 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी के मामले में छह अलग अलग चार्जशीट दायर कीं। सीबीआई ने कंपनी के अलावा पांच मामलों में जूम डेवलपर्स के प्रमोटरों व निदेशकों विजय एम चौधरी, शरद टिकमदास काबरा, सीए शैलेश ठाकुर, रमेश डी अजमेरा और सोवन दासगुप्ता के खिलाफ चार्जशीट दायर की, जबकि एक मामले में मंजरी चौधरी को आरोपी बनाया है।
सीबीआई के अधिकारियों ने सोमवार को बताया, कंपनी ने विदेश में एग्रीगेटरों के जरिये फैक्टरियों और प्लांट को स्क्रैप करने का काम किया। यह काम विदेशी बैंकों द्वारा जूम डेवलपर्स को दी गई गारंटी के आधार पर दिया गया। विदेशी बैंकों ने यह गारंटी भारतीय बैंकों द्वारा दी गई गारंटी के आधार पर दी थी। एग्रीगेटरों का भुगतान बैंकों की देनदारियों से कम था।
वहीं एग्रीगेटरों से मिली रकम को कंपनी ने अन्य गतिविधियों में इस्तेमाल किया, जिनकी जानकारी बैंक गारंटी लेते वक्त नहीं दी गई। सीबीआई के मुताबिक, कंपनियों ने 26 बैंकों से गारंटी ली थी। बैंकों ने जूम डेवलपर्स को 2510 करोड़ रुपये का कर्ज लिया और इस रकम को दूसरे कामों में लगाया। साथ ही वे प्रोजेक्ट भी पूरे नहीं किए, जिनके लिए विदेशी बैंकों ने गारंटी दी थी।
कंपनी ने भारतीय बैंकों को हुए घाटे का भुगतान नहीं किया। सीबीआई के मुताबिक, इससे ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स को 131.51 करोड़, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद को 113.90 करोड़, इलाहाबाद बैंक को 113 करोड़, विजया बैंक को 104 करोड़, कॉरपोरेशन बैंक को 55.30 करोड़ और आंध्रा बैंक को 40.45 करोड़ का घाटा हुआ।