केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री डा. महेश शर्मा को बुधवार को राज्यसभा में विपक्ष की आलोचना झेलनी पड़ी जब उन्होंने कहा कि सीता के जन्मस्थान का मसला आस्था से जुड़ा हुआ है जबकि विपक्ष ने कहा कि इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। हालांकि केंद्रीय मंत्री ने अपने लिखित जवाब के बचाव में कहा कि सीता के जन्मस्थान को लेकर कोई प्रश्नचिह्न नहीं है और वाल्मीकि रामायण में इसका जिक्र किया गया है।
प्रश्नकाल के दौरान भाजपा सदस्य प्रभात झा ने बिहार के सीतामढ़ी क्षेत्र के विकास का विवरण चाहा जिसे वह विवादित जन्मभूमि नहीं मानते। जवाब में शर्मा ने कहा कि सरकार ने रामायण सर्किट विकसित करने की योजना बनाई है जिसमें सीतामढ़ी क्षेत्र भी शामिल है। हालांकि कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह विरोध में तुरंत उठ खड़े हुए और सीता के जन्मस्थान को आस्था से जुड़ा मुद्दा बताने वाले बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि ऐसा कहने से साबित होता है कि प्रत्यक्ष प्रमाण पर कोई जवाब नहीं दिया गया है।
डा. महेश शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह सच है कि वहां पुरातत्व विभाग ने कोई खुदाई नहीं की है लेकिन उनके जन्मस्थान को लेकर कोई प्रश्नचिह्न नहीं है। उन्होंने अपने जवाब में कहा कि मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर राज्य सरकार डीपीआर भेजेगी तो मंत्रालय मंजूरी देगा।
दरअसल भाजपा सांसद प्रभात झा ने सीतामढ़ी स्थित सीताजी के जन्मस्थान के जीर्णोद्धार और उस इलाके को धार्मिक पर्यटन से जोड़ने का मामला राज्यसभा में उठाया था। उन्होंने कहा कि इस स्थान को लेकर कोई विवाद भी नहीं है। मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि मंदिर परिसर और विकास कार्य में शिथिलता पर वे बिहार सरकार से बात करेंगे।