शीघ्र ही बच्चों के बैंक खाते में आरटीजीएस से स्कॉलरशिप की राशि जमा होगी।
मजबूरी में ममता भी बिक जाती है। कोख में पल रहे बच्चों तक का सौदा भी हो जाता है। हां, ये बात कोई नयी नहीं है लेकिन एक बार फिर ये बेहद कड़व सच आपके सामने हैं। दो दो रोटी के लिए तरसती महफूज नगर निवासी रिजवाना मजबूरी में अपनी कोख में पल रहे बच्चे को किसी को भी देने को तैयार है बस बदले में उसे कुछ पैसे चाहिए ताकि वह अपनी बेटी और खुद का पेट भर सके।
27 साल की रिजवाना उर्फ सोनी गोश्त वाली गली के सामने महफूज नगर में अपनी बहन रिहाना और बहनोई अख्तर हुसैन के साथ रहती हैं। 15 दिन पहले ही वह यहां पर आई है। जब मकान मालिक ने महज ढाई हजार रुपये का किराया नहीं चुकाने पर उसका सामान अपने कब्जे में लेकर घर से बाहर निकाल दिया था।
खाने के लिए तरस रही रिजवाना किराया नहीं चुका पाई थी क्योंकि उसका शौहर वली मोहम्मद कहने तो मजदूरी करता है लेकिन महीनों तक गायब रहता है और परिवार की खैर खबर तक नहीं लेता है।
बहनोई के घर आने से पहले रिजवाना ऊपरकोट स्थित बू अली शाह मसजिद के पास रहती थी। तीन साल पहले रिजवाना की शादी हुई थी और अब उसके साथ पौने दो साल की बेटी चांदनी भी है। मां बेटी किसी तरह से रो रो कर अपना गुजारा कर रहे हैं।
बहन बहनोई भी रिजवाना को किसी तरह से दो वक्त की रोटी तो दे रहे हैं, लेकिन अब उसके गर्भस्थ शिशु का खर्च वहन करने में उन्होंने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। इसलिए मजबूरी में सबने तय किया कि रिजवाना के होने वाले बच्चे को किसी ऐसे परिवार को दिया जाए जो उसको पालन पोषण दे सके और रिजवाना की भी आर्थिक मदद कर सके।