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SIR Row: बंगाल में मिला बुजुर्ग का शव, टीएमसी बोली- एसआईआर का डर ले रहा लोगों की जान; कुल 11 मौतों पर दावा

Fri, 14 Nov 2025 09:34 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

जलपाईगुड़ी में एक 60 वर्षीय व्यक्ति का शव मिलने के बाद पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है। परिवार का दावा है कि मतदाता सूची में बेटी का नाम गायब मिलने से वह मानसिक तनाव में थे। टीएमसी ने इसे एसआईआर से पैदा हुए भय का परिणाम बताया और 11 ऐसी मौतों का दावा किया।
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ममता बनर्जी, सीएम, पश्चिम बंगाल - फोटो : ANI
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष इंटेंसिव रिवीजन को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच जलपाईगुड़ी जिले में 60 वर्षीय व्यक्ति का शव पेड़ से लटका मिला। घटना ने राज्य में SIR को लेकर फैले तनाव और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को एक बार फिर हवा दे दी है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने दावा किया कि यह मौत SIR की प्रक्रिया के कारण पैदा हुए डर का नया उदाहरण है।

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पुलिस के अनुसार, राजगंज क्षेत्र के निवासी भुवन चंद्र राय गुरुवार रात से लापता थे और शुक्रवार सुबह उनका शव पेड़ से लटका मिला। पुलिस ने बताया कि परिवार के अनुसार उनकी बेटी का नाम मतदाता सूची से गायब होने के बाद से वह मानसिक तनाव में थे। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की आशंका व्यक्त की गई है, जबकि पुलिस ने मामले की जांच जारी रखी है।

टीएमसी का आरोप
टीएमसी ने एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि भुवन चंद्र राय की मौत कोई इत्तफाक नहीं है, बल्कि एसआईआर प्रक्रिया की खामियों का परिणाम है। पार्टी का कहना है कि मृतक की बेटी को कभी एन्यूमरेशन फॉर्म नहीं मिला और इसी चिंता में उन्होंने अपनी जान दे दी। टीएमसी ने कहा कि यह मानव त्रासदी है, जिसे जल्दबाजी और राजनीतिक दबाव में लाए गए एसआईआर ने जन्म दिया है।
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 टीएमसी ने 11 मौतों का दावा दोहराया
राजगंज के विधायक खगेश्वर राय ने मृतक के घर पहुंचकर परिवार को सांत्वना दी और दावा किया कि राज्य में ऐसे कम से कम 11 मामले सामने आए हैं, जिनमें सात ने आत्महत्या की है। टीएमसी ने आरोप लगाया कि एसआईआर की आड़ में राज्य में घबराहट फैलाई जा रही है और इससे लोगों में डर, मानसिक दबाव और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। उनका कहना है कि इस इंजीनियर्ड पैनिक का फायदा सिर्फ उन राजनीतिक दलों को हो रहा है, जो मतदाताओं को भयभीत कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर पकड़ बनाना चाहते हैं।

चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में एसआईआर अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य मृत, प्रवासी और दोहराए गए मतदाताओं के नाम हटाना और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ना है। आयोग के अनुसार यह एक सामान्य सत्यापन प्रक्रिया है, लेकिन इसकी जमीनी स्तर पर लागू होने की व्यवस्था लगातार आलोचना में है।

भुवन चंद्र की मौत के बाद विपक्ष ने इस प्रक्रिया को न सिर्फ त्रुटिपूर्ण बताया, बल्कि आयोग पर बदइंतजामी के आरोप भी लगाए हैं। फिलहाल पुलिस घटना की जांच कर रही है, जबकि एसआईआर को लेकर राज्य में तनाव और राजनीतिक गर्माहट बढ़ी हुई है।
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