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Digital: हर साल 22 टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर डाटा बना रहा है एक इंसान, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

Wed, 05 Jul 2023 05:17 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लॉगबोरो विश्वविद्यालय से जुड़े वैज्ञानिकों ने अपनी तरह का पहला टूल बनाया है। इस अनोखे कार्बन फुटप्रिंट टूल से डिजिटल डाटा के कारण पैदा हो रही कार्बन डाइऑक्साइड को मापा जा सकता है। इसे डाटा कार्बन लैडर का नाम दिया गया है।
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internet - फोटो : istock
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विस्तार
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क्या आप जानते हैं कि आपकी प्रतिदिन की डिजिटल गतिविधियां कितना डाटा पैदा कर रही हैं और पर्यावरण पर उसका क्या असर पड़ रहा है? वैज्ञानिकों के अनुसार, औसतन एक व्यक्ति प्रति सेकंड 1.7 एमबी डाटा पैदा करता है, यह एक दिन में करीब 10-डीवीडी के बराबर है। यह डाटा वो है जो फोटो, वीडियो, टेक्स्ट और ई-मेल के जरिए उत्पन्न होता है।

शोध के अनुसार, यदि पर्यावरण पर इसके प्रभाव को देखें तो औसतन व्यक्ति हर साल इतना डाटा पैदा करता है जो करीब 22 टन कार्बन डाइऑक्साइड पैदा करने के बराबर होता है। यह छिपा हुआ कार्बन फुटप्रिंट कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह लंदन से न्यूयॉर्क तक करीब 26 बार उड़ान भरने के बराबर है। यदि इस कार्बन डाइऑक्साइड को प्राकृतिक तरीके से ऑफसेट करने की लागत को देखते हैं तो इस पर करीब 283 डॉलर का खर्च आएगा। शोधकर्ताओं के अनुसार, जो परिणाम हमें नजर आ रहे हैं वो इस विकराल समस्या का एक छोटा सा हिस्सा है। क्योंकि जब हम इन्हें सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर साझा करते हैं तो इनका वैश्विक स्तर काफी बढ़ जाता है। इस मामले में शोधकर्ताओं ने क्रिस्टियानो रोनाल्डो की एक इंस्टाग्राम पोस्ट का हवाला देते हुए बताया है कि उनकी एक पोस्ट की औसत पहुंच बहुत ज्यादा ऊर्जा की खपत करती है।

विमानन उद्योग से भी ज्यादा उत्सर्जन

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शोधकर्ताओं के अनुसार, इन डिजिटल आंकड़ों को डाटा कंपनियां एकत्र करती हैं और फिर दुनियाभर के अलग-अलग डाटा केंद्रों में बाइट्स के रूप में स्टोर किया जाता है। यदि इन डाटा केंद्रों को देखें तो यह इन्सानों की ओर से किए जा रहे कुल कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के करीब 3.8 फीसदी हिस्से के लिए जिम्मेदार है। यह उत्सर्जन विमानन उद्योग से भी ज्यादा है। विश्वस्तर पर शुद्ध शून्य उत्सर्जन और डीकार्बोनाइजेशन संबंधी नीतियों के लिए इनका भी आकलन जरूरी है। इतना ही नहीं यह डाटा सेंटर बड़े पैमाने पर बिजली और पानी की भी खपत कर रहे हैं।

विशेष टूल बनाया
इसी को ध्यान में रखते हुए लॉगबोरो विश्वविद्यालय, लंदन से जुड़े वैज्ञानिकों ने अपनी तरह का पहला टूल बनाया है। इस अनोखे कार्बन फुटप्रिंट टूल से डिजिटल डाटा के कारण पैदा हो रही कार्बन डाइऑक्साइड को मापा जा सकता है। इसे डाटा कार्बन लैडर का नाम दिया गया है। शोधकर्ता वैज्ञानिकों का कहना है कि इस टूल की मदद से कंपनियां डाटा के मामले में समझदारी से निर्णय ले सकती हैं जो पर्यावरण के साथ-साथ उनके लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद हो सकता है।

 

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