सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार करते हुए भी कुछ कानूनी सवालों के मामले को बड़ी पीठ के पास भेजने में किसी प्रकार का बंधन नहीं है। यह कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली 9 सदस्यीय संविधान पीठ ने सबरीमाला के फैसले के बाद सभी धर्मों एवं मान्यताओं के अधिकार को लेकर दिए गए अपने निर्णय पर विस्तृत तर्क दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि सबरीमाला मामले में पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार करते हुए इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेज दिया था। पीठ ने कहा था कि बड़ी पीठ केवल सबरीमाला मामले पर नहीं, बल्कि मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश, पारसी महिलाओं का किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति से शादी करने के बाद अग्नि मंदिर में प्रवेश पर पाबंदी और दाउदी बोहरा समुदाय की महिलाओं के खतने जैसे मुद्दे पर विचार करेगी।
इसके बाद नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था कि पुनर्विचार याचिका पर विचार करते हुए भी कोई कानूनी सवाल खड़ा होने पर मामले को बड़ी पीठ के पास भेजा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता और अनुच्छेद 26 का सही परीक्षण जरूरी है। पीठ ने कहा कि यह दोनों ही अनुच्छेद बेहद अहम हैं।