सुप्रीम कोर्ट के नेपाली मूल के लोगों को अप्रवासी बताने पर सिक्किम में हंगामा जारी है। इसे लेकर सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट ने 48 घंटे के बंद का आह्वान किया है। हालांकि इस बंद के दौरान रविवार को हिंसा भड़क गई। जिसमें सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर एसडीएफ के मुख्यालय पर हमला बोल दिया और वहां तोड़फोड़ की। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया। हालात को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
घटना गंगटोक में दामथांग रोड पर स्थित एसडीएफ मुख्यालय में घटी। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। तीनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 147 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले गंगटोक में मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग का पुतला जलाने के आरोप में पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार किए गए लोगों में युवा नेता अरुण लिंबु और पूर्व मंत्री शेरिंग वांगडी लेप्चा शामिल हैं।
गृहमंत्री शाह ने सिक्किम के प्रतिनिधिमंडल को दिया भरोसा
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को सिक्किम प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के नेतृत्व वाले एक प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि वित्त एवं गृह मंत्रालय एक समीक्षा याचिका दायर करके उच्चतम न्यायालय से सिक्किमी शब्द पर संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप स्पष्टता का अनुरोध करेंगे। यह जानकारी आधिकारिक सूत्रों ने दी।
अमित शाह की ओर से यह भरोसा ऐसे समय दिया गया है जब उच्चतम न्यायालय की एक टिप्पणी को लेकर राज्य में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। शीर्ष अदालत ने राज्य के सभी पुराने निवासियों को आयकर छूट का विस्तार करते हुए सिक्किमी नेपाली समुदाय को ‘अप्रवासी’ बताया था। गृहमंत्री शाह ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि सिक्किमी समुदाय की भावनाओं का सम्मान किया जाता है।
सूत्रों के अनुसार, शाह ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि सिक्किम के लोग भारत का अभिन्न और आवश्यक हिस्सा हैं। सिक्किम के लोगों के लिए संवैधानिक प्रावधान की रक्षा की जाएगी।
बता दें कि बीती 13 जनवरी को सिक्किम के निवासियों को इनकम टैक्स में छूट से संबंधित एक याचिका पर फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नेपाली मूल के लोगों को अप्रवासी के रूप में संदर्भित किया था, जो सिक्किम में आकर बस गए थे। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी से प्रदेश की राजनीति में खलबली मच गई और नेपाल मूल के लोग इसके विरोध में सड़कों पर उतर आए। गौरतलब है कि सिक्किम में बड़ी संख्या में नेपाली मूल के लोग रहते हैं। सिक्किम में लोगों का विरोध किस पैमाने पर इसे इस बात से समझा जा सकता है कि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी ने भी कोर्ट के फैसले के बाद विरोध प्रदर्शन किया। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका दायर करने की बात कही है।
किरेन रिजिजू बोले- हम राज्य सरकार के समर्थन में
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट द्वारा सिक्किमी नेपालियों पर कथित टिप्पणी को लेकर सिक्किम में हो रहे विरोध के बीच कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राज्य सरकार के समर्थन में केंद्र सरकार शीर्ष अदालत में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर रहा है।
कानून मंत्री रिजिजू ने ट्वीट करके कहा कि 'मैंने सिक्किम के मुख्यमंत्री पी एस तमांग से बात की है। भारत सरकार सॉलिसिटर जनरल के माध्यम से सिक्किम सरकार का समर्थन करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक समीक्षा याचिका भी दायर कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार सिक्किम के लोगों के साथ खड़ी है।
एक अन्य ट्वीट में, उन्होंने सिक्किम के लोगों को आश्वासन देते हुए लिखा कि 'यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 371F (राज्य से संबंधित) से संबंधित या कमजोर नहीं है और इसका किसी की नागरिकता से कोई लेना-देना नहीं है। हम प्रत्येक वास्तविक भारतीय की संवैधानिक स्थिति को महत्व देते हैं और किसी भी कीमत पर इसकी रक्षा की जाएगी।'