रात करीब एक बजे अचानक पुलिस की सीटी से नींद खुली। कुछ समझ नहीं आ रहा था। पुलिस कहग रही थी, नदी में पानी का स्तर बढ़ रहा है। तुरंत घर खाली करो और उपर की ओर चलो। यह कहते हुए पुलिस लोगों को जगा रही थी। किसी तरह से बहू और बच्चों को साथ लिया। रात के अंधेरे में सब कुछ छोड़ कर किसी तरह गिरते पड़ते यहां पहुंचे हैं। यह कहते हुए सुबक पड़ती हैं बुजुर्ग मीरा।
उन्होंने बताया कि सब कुछ छूट गया। पता नहीं क्या हो गया। कुछ समझ ही नहीं आया। जब तक समझ पाते नदी उफान पर थी। केवल इन कपड़ों के साथ ही निकल पाए, कहते हुए मीरा की अश्रुधारा बह निकलती हैं। मीरा कहती हैं कि पता नहीं क्या होगा। कुछ भी ला नहीं पाए। हमारा घर बिल्कुल नदी के किनारे पर है। पता नहीं क्या होगा। बस, भगवान का शुक्र है कि मैं नातियों को लेकर यहां तक पहुंच पाई।
उन्होंने कहा कि अब कहां जाएंगे, क्या खाएंगे कुछ नहीं मालूम। अभी तक पता नहीं चल पाया है कि पानी इतना नदी में कैसे आया। चारों ओर हाहाकार है। हर कोई अपनों को खोज रहा है। कुछ समझ नहीं आ रहा है। लगातार बारिश हो रही है। ये कब रुकेगी, कुछ नहीं पता। हम पर मुसिबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। हमें अभी तक पता नहीं है कि आखिर ये पानी इतना आया कहां से।
एक अन्य पीड़ित ने बताया कि मैं सो रहा था, अचानक घर के अंदर पानी आने पर नींद खुली। पहले तो कुछ समझ में ही नहीं आया। लेकिन जब तक होश आया, काफी देर हो चुकी थी। यह कहते हुए राजन रोने लगे। राजन का घर भी नदी के किनारे पर ही है। पानी घर के अंदर आ चुका था। किसी तरह से परिवार के लोगों को उठाया और ऊपर की तरफ दौड़ पड़े।
राजन ने रोते हुए बताया हम कुछ भी उठा नहीं पाए। पहने हुए कपड़े भी भीग गए हैं। लगातार यहां पर बारिश हो रही है। समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें, कहां जाएं। कब तक मदद मिल पाएगी। क्या खाएंगे, क्या पहनेंगे कुछ नहीं पता। हर तरफ यही मंजर है। सब तरफ अफरा-तफरी का माहौल है। मुख्यमंत्री सहित हर कोई राहत और बचाव कार्य में कूद पड़े हैं। हर किसी की जुवां पर एक ही सवाल है, कब बारिश रूकेगी और कब तिस्ता का पानी घटेगा और कब राहत मिल पाएगी।