राहुल गांधी के सिख दंगों पर दिए गए बयान पर दिल्ली में राजनीति तेज हो गई है। आप ने भाजपा से सवाल किया है कि भाजपा को बताना चाहिए कि उसके हाथ में सीबीआई, आइबी और पुलिस आने के बाद पिछले साढ़े चार साल में कितने सिख कातिलों को फांसी की सजा हुई है? आप ने भाजपा पर कांग्रेस के साथ इस मुद्दे पर समझौता करने का आरोप लगाया है। आप के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा सरकार के हाथ में पूरी ताकत है। अगर वह चाहती तो इस मुद्दे पर इंसाफ किया जा सकता था, लेकिन उसने इस दौरान कुछ नहीं किया और इसी का परिणाम है कि सिखों के कातिल आज भी खुलेआम घूम रहे हैं।
आप के एक अन्य नेता जरनैल सिंह ने एक बयान जारी कर कहा है कि भाजपा ने एक साल के अंदर सिख दंगों के आरोपियों को सजा दिलवाने का वायदा किया था। लेकिन इतना समय बीत जाने के बाद भी कुछ नहीं हुआ। उनके मुताबिक भाजपा और कांग्रेस में 2002 के गुजरात दंगों और 1984 के सिख दंगों को लेकर आपस में समझौता हो गया है। यही कारण है कि दोनों ही एक दूसरे के ऊपर कोई कार्रवाई नहीं करते और पीड़ितों को कोई न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि एसआईटी का इस मामले पर पूरी जांच किए बिना ही मामले को बंद कर देना इस सांठगांठ का एक सबूत है।
आप और भाजपा में यह वाकयुद्ध तब शुरु हुआ जब दिल्ली भाजपा के एक नेता मनजिंदर सिरसा ने राहुल के सिख दंगों पर दिए बयान पर कठोर टिप्पणी की। सिरसा ने कहा कि राहुल गांधी अपने पिता राजीव गांधी से भी एक कदम आगे निकल गए और सिख दंगों से अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा कि मॉब लिंचिंग के मामलों पर बड़बोले बयान देने वाली कांग्रेस की सच्चाई यह है कि उसे सिख दंगों के बारे में अपनी पार्टी के कुछ नेताओं की भूमिका पर न तो कोई पछतावा है और न ही उन्हें न्याय मिल पाया है।
दरअसल, दिल्ली की सियासत में यह तूफान राहुल गांधी के उस बयान के बाद आया है जो उन्होंने अपनी विदेश यात्रा के दौरान दिया है। राहुल ने लंदन में पूछे गए एक सवाल के जवाब में अपनी पार्टी का बचाव किया है और कहा है कि सिख दंगों के लिए वह या उनकी पार्टी जिम्मेदार नहीं है। कांग्रेस के एक नेता ने यह कहकर राजनीति और गरमा दी है कि सिख दंगों के समय राहुल महज चौदह साल के थे, इसलिए वे इन दंगों के लिए जिम्मेदार नहीं हैं और उनसे इस पर सवाल नहीं पूछे जाने चाहिए।