फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Explainer: क्या है राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, कब-किसने-कैसे किया गठन; कौन बना सदस्य, विवाद किन चेहरों पर?

Sun, 28 Jun 2026 06:01 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एफआईआर दर्ज होने और आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। ट्रस्ट की तरफ से इसकी पुष्टि करते हुए बयान भी जारी किया गया है। आइये जानते हैं कि आखिर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट क्या है, इसके सदस्य कौन हैं और इसका संचालन कैसे होता है...
विज्ञापन
राम मंदिर चंदा विवाद - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राम मंदिर के चढ़ावे में हुए करोड़ों रुपये के गबन और इसे लेकर हालिया समय में हुई कार्रवाई को लेकर पहली बार राम मंदिर का प्रबंधन संभालने वाले 'राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' ने बयान जारी किया है। ट्रस्ट ने पुष्टि की है कि उसके महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने कहा कि अगली बैठक में इन इस्तीफों पर विचार किया जाएगा। साथ ही यह भी कहा कि श्रद्धालुओं की तरफ से दान की गई चांदी की ईंटें, आभूषण, आदि हिसाब के साथ सुरक्षित हैं।
विज्ञापन


राम मंदिर को लेकर हुए खुलासों को अब करीब तीन हफ्ते हो चुके हैं। हालांकि, ट्रस्ट की तरफ से इस विवाद पर कोई बयान नहीं दिया गया। अलग-अलग समय पर इसके सदस्य जरूर मीडिया से मुखातिब हुए, लेकिन ट्रस्ट की इस विवाद को लेकर कोई टिप्पणी नहीं आई। इस बीच राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहचान, इसके सदस्य और इसकी कार्यशैली से भी बड़ी संख्या में लोग अनजान ही रहे हैं।

हाल ही में इन विवादों के बीच ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई। खासकर चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र के इस्तीफों और पहले से रिक्त एक ट्रस्टी पद को मिलाकर ट्रस्ट के तीन अहम पद खाली हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में वर्तमान ट्रस्ट भंग कर उसके पुनर्गठन की संभावना बन सकती है। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के पुनर्गठन के साथ भविष्य में तिरुपति और वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तर्ज पर अधिक पेशेवर प्रशासनिक व्यवस्था लागू हो सकती है। इसमें मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की तैनाती की जा सकती है। 
विज्ञापन

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट क्या है? इसके सदस्य कौन-कौन हैं? किस सदस्य को इसमें क्या जिम्मेदारी मिली है और ट्रस्ट की कार्यशैली क्या है? इसके अलावा हालिया समय में राम मंदिर को लेकर क्या विवाद हुआ है और इसमें ट्रस्ट के किन सदस्यों और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है? आइये जानते हैं...

क्या है राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट?

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वतंत्र और स्वायत्त निकाय है, जिसे अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर के निर्माण, वित्त और प्रशासन की देखरेख के लिए स्थापित किया गया है। 

राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट। - फोटो : अमर उजाला
सरकार की तरफ से अधिग्रहित लगभग 67.703 एकड़ जमीन को इसी ट्रस्ट को सौंपने का निर्णय लिया गया था।


राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कौन-कौन हैं, इनकी जिम्मेदारी क्या?

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कुल 15 सदस्यों का प्रावधान है, जिनमें से 12 सदस्यों को सरकार की तरफ से नामित किया गया था और तीन का चयन ट्रस्ट की पहली बैठक में हुआ था। मौजूदा समय में ट्रस्ट में 14 सदस्य हैं। इसके एक सदस्य विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र का अगस्त 2025 को निधन हो गया था। वे अयोध्या के शाही परिवार के वंशज थे। 

1. के. परासरन 
यह ट्रस्ट के संस्थापक-ट्रस्टी सदस्य और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। इन्होंने राम जन्मभूमि विवाद में राम लला विराजमान का पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रखा था। 

2. महंत नृत्य गोपाल दास 
यह श्री राम जन्मभूमि न्यास और श्री कृष्ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष होने के साथ-साथ अयोध्या की छोटी छावनी के पीठाधीश्वर भी हैं।

3. चंपत राय 
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के उपाध्यक्ष। यह ट्रस्ट के महासचिव हैं। इनकी मुख्य जिम्मेदारी मंदिर का दिन-प्रतिदिन का प्रशासन संभालना, सार्वजनिक संचार देखना और मंदिर निर्माण की देखरेख करना है।
 

4. स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज 
एक प्रमुख आध्यात्मिक गुरु हैं। इनका पूर्व नाम आचार्य किशोरजी मदनगोपाल व्यास था। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय इन्होंने ही प्रधानमंत्री मोदी को अपना 11 दिन का उपवास तोड़ने के लिए चरणामृत दिया था। यह ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं। इनकी जिम्मेदारी ट्रस्ट के सभी वित्तीय मामलों की देखरेख करना है।

5. नृपेंद्र मिश्रा 
यह मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और ट्रस्ट के पदेन सदस्य हैं। यह 1967 बैच के पूर्व आईएएस अधिकारी हैं, जो 2014 से 2019 तक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव भी रहे हैं। इनकी मुख्य भूमिका राम मंदिर के निर्माण कार्य की देखरेख और उसका सुचारू संचालन सुनिश्चित करना है। 

6. डॉ. अनिल मिश्रा 
यह एक होम्योपैथिक डॉक्टर हैं, जो आरएसएस से लंबे समय तक जुड़े रहे हैं और ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य हैं। ट्रस्ट के प्रमुख निर्णयों में इनकी अहम भूमिका रही है।

7. कृष्णा मोहन 
यह महाराष्ट्र कैडर के एक सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी हैं। ट्रस्ट के एक अन्य सदस्य कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद इन्हें सितंबर 2025 में ट्रस्ट में शामिल किया गया था। यह मंदिर के निर्माण में मार्गदर्शन में शामिल रहे हैं।

8. शशांक त्रिपाठी 
यह 2016 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में अयोध्या के जिलाधिकारी (डीएम) के रूप में कार्यरत हैं। इनकी मुख्य जिम्मेदारी प्रशासनिक मामलों, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था में समन्वय की सुविधा प्रदान करना है। हालांकि, दान या खातों के प्रबंधन में जिलाधिकारी की सीधी भूमिका नहीं होती।

9. संजय प्रसाद 
यह बिहार के 1995 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं। यह ट्रस्ट में यूपी सरकार के प्रतिनिधि के रूप में एक पदेन सदस्य हैं।

10. प्रशांत लोखंडे
यह एजीएमयूटी कैडर के 2001 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, जो सीबीएसई के अध्यक्ष हैं। यह ट्रस्ट में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि (पदेन सदस्य) हैं।

11. युगपुरुष परमानंद गिरी 
यह एक प्रमुख आध्यात्मिक गुरु हैं जिन्हें कर्म योगी और ज्ञानी योगी भी कहा जाता है।
 

12. दिनेंद्र दास 
यह अयोध्या के निर्मोही अखाड़े का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो राम मंदिर मामले में कोर्ट में वादियों (पक्षकारों) में से एक था।

13. स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती 
यह बद्रीनाथ स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं।

14. स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ 
यह कर्नाटक के उडुपी स्थित अष्ट मठों में से एक, श्री पेजावर अधोक्षज मठ के वर्तमान पीठाधीश्वर हैं। प्राण प्रतिष्ठा के दौरान  अयोध्या में हुए पूजा कार्यक्रमों का नेतृत्व करने की अहम जिम्मेदारी इन्होंने निभाई थी।

\

ट्रस्ट की कार्यशैली क्या है, प्रशासन कैसे चलता है?

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक पूरी तरह से स्वायत्त और स्वतंत्र निकाय है, जो अपने खुद के विलेख (डीड) से संचालित होता है।

1. प्रशासनिक ढांचा और नियंत्रण

  • ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय मंदिर का दिन-प्रतिदिन का प्रशासन और सार्वजनिक संचार का कार्य संभालते हैं।
  • ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी सभी वित्तीय मामलों की देखरेख करते हैं, जबकि अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ट्रस्ट की अध्यक्षता करते हैं।
  • उत्तर प्रदेश सरकार या प्रशासन का ट्रस्ट के खातों या दान प्रबंधन पर कोई नियंत्रण नहीं है। 
  • सरकार और प्रशासन की भूमिका भी सिर्फ सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और प्रशासनिक समन्वय तक सीमित है। 
  • ट्रस्ट में राज्य सरकार के प्रतिनिधि पदेन सदस्य होते हैं, लेकिन वित्तीय निर्णयों में उन्हें कोई वोटिंग का अधिकार नहीं होता।


2. दान और नकदी प्रबंधन की प्रक्रिया

बहु-स्तरीय व्यवस्था: मंदिर परिसर में लगभग 35 दान पेटियां रखी गई हैं। ट्रस्ट ने दान की गिनती और बैंकिंग के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को अधिकृत किया है, जिसने इस काम को एक निजी एजेंसी को आउटसोर्स कर दिया।

गिनती की प्रक्रिया: नकदी गिनने का काम दो शिफ्टों में होता है, जिसमें लगभग 50 लोग शामिल होते हैं। निजी एजेंसी के कर्मचारी नोट गिनते हैं, ट्रस्ट के 12 कर्मचारी उनकी निगरानी करते हैं, सीसीटीवी नेटवर्क संभालने की जिम्मेदारी टीसीएस की है। अंत में 14 एसबीआई कर्मचारी पैसे जमा करने से पहले नोटों के बंडलों का सत्यापन करते हैं।

मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के मुताबिक, वर्तमान में मंदिर का दैनिक संचालन मुख्य रूप से करीब 1,500 स्वयंसेवक संभाल रहे हैं। इसमें भूमिकाओं और जिम्मेदारियों की कोई तय औपचारिकता नहीं है। 
 

3. ट्रस्ट का जवाबदेही तंत्र

  • ट्रस्ट अपने प्रशासन में सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी साझा करने का विरोध करता है और खुद को एक स्वतंत्र संस्था मानता है। गृह मंत्रालय ने भी कहा था कि यह ट्रस्ट सरकार द्वारा वित्त पोषित या नियंत्रित नहीं है। 
  • बीते साल दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) को यह तय करने का निर्देश दिया है कि यह ट्रस्ट आरटीआई अधिनियम के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण के दायरे में आता है या नहीं।

राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर क्या विवाद हुआ है?

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर हालिया विवाद मुख्य रूप से मंदिर में आए दान- नकदी, सोने-चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं के प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताओं और हेराफेरी से जुड़ा है। 

दान की राशि में हेराफेरी और गायब होना
शुरुआत में समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मंदिर के दान से सात से साढ़े सात करोड़ रुपये गायब हैं। बाद में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इस कथित घोटाले के 200 करोड़ रुपये से अधिक होने का दावा किया गया। आरोप लगा कि नकदी गिनने वाले कर्मचारियों ने दान पेटियों से मिली वास्तविक राशि की तुलना में वाउचर में कम राशि दर्ज की। 



कीमती वस्तुओं (सोने-चांदी) का गायब होना
बाद में खुलासा हुआ कि सोने और चांदी के चढ़ावे में भी हेरफेर हुई। धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे ने यह सनसनीखेज आरोप लगाया है कि सोने, चांदी, हीरे और रूबी से बनी लगभग 1,250 राम शिलाएं भी गायब हो गई हैं, जिन्हें देश-विदेश से लाया गया था।

सबूत मिटाने के लगे आरोप
दान प्रबंधन की गड़बड़ियों को छिपाने के लिए नकदी छांटने वाले क्षेत्र के सात से आठ महीने के सीसीटीवी फुटेज को कथित तौर पर डिलीट किए जाने के आरोप भी सामने आए। राम मंदिर के पूर्व अकाउंट्स-इन-चार्ज और मामले का खुलासा करने वाले महिपाल सिंह ने दावा किया कि जब उन्होंने इन अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाई, तो उन्हें उनके पद से हटा दिया गया।

कर्मचारियों की बेहिसाब संपत्तियों का खुलासा
यह विवाद तब और गहरा गया जब सरकार की तरफ से गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) के जांचकर्ताओं ने पाया कि दान गिनने में शामिल कुछ कर्मचारियों, जिनका मासिक वेतन 18,000-20,000 रुपये है, ने 1.5 करोड़ रुपये और 40 लाख रुपये की महंगी जमीनें और गाड़ियां खरीदी हैं, जो उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक है।



23 जून: एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट राज्य के गृह विभाग को सौंप दी, जिसमें आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की सिफारिश की गई थी।

25 जून: मामला उजागर होने के लगभग 19-20 दिन बाद और एसआईटी की सिफारिश के आधार पर, ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर राम जन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस ने चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के करीबियों सहित कुल आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया। रात भर चली पूछताछ के बाद आरोपियों के पास से दानपात्र से चोरी की गई रकम बरामद की गई।

26 जून: गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपियों को मेडिकल परीक्षण के बाद अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 29 जून तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इसी दिन, लगातार उठ रहे सवालों, निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और प्रशासनिक जवाबदेही के दबाव में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया।

यहां पढ़ें पूरा मामला: Explainer: क्या है अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावे के गबन का पूरा मामला, कब-कैसे हुआ घटनाक्रम, कौन था शामिल?

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों की भूमिका पर क्यों सवाल?

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों की भूमिका पर सवाल उठने की मुख्य वजह यही है कि चढ़ावा चोरी का जो घोटाला सामने आया है, उसमें गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के बेहद करीबी और रिश्तेदार निकले हैं।  

1. चंपत राय-अनिल मिश्रा के करीबियों पर लगे हैं आरोप

चंपत राय के बेहद करीबी और उनके ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को इस चोरी का अहम किरदार माना जा रहा है। टिन्नू के पास ही नकदी गणना कक्ष की चाबियां रहती थीं और वह मंदिर की हर व्यवस्था में दखल देता था। इसके अलावा, टिन्नू का भतीजा मनीष यादव भी गणना प्रक्रिया में शामिल था और उसके पास से भी चोरी की रकम बरामद हुई है। जब इस घोटाले की खबरें सामने आईं, तो चंपत राय ने शुरुआत में 8 जून को इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि आंतरिक ऑडिट में कोई गड़बड़ी नहीं मिली है।

दान की गणना करने वाले जिन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा शामिल हैं, जो डॉ. अनिल मिश्रा के रिश्तेदार हैं। इन दोनों की ड्यूटी दान गिनने वाले कक्ष में लगाई गई थी और इनके घरों से चोरी की गई रकम भी बरामद हुई है।

2. नृपेंद्र मिश्रा ने साध ली चुप्पी

मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने शुरुआत में कहा था कि उन्हें केवल निर्माण से मतलब है। फिर उन्होंने बयान बदलकर कहा कि मंदिर में चोरी नहीं डकैती हुई है, लेकिन अब उन्होंने इस मुद्दे पर पूरी तरह चुप्पी साध ली है और कहा है कि वह जांच पूरी होने तक कुछ नहीं बोलेंगे।

3. गोपाल राव पर सवाल

दूसरी ओर अयोध्या राम मंदिर के निर्माण सहायक गोपाल राव न तो ट्रस्ट के पदाधिकारी हैं और न ही सदस्य। इसके बावजूद मंदिर प्रबंधन के अहम फैसलों में उनका दखल रहता है। उनके एक रिश्तेदार का नाम भी जांच के दायरे में आने के कारण उनकी भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।


इस मामले में ताजा स्थिति क्या?

इस घोटाले के भारी दबाव, पुलिस जांच और प्रशासनिक जवाबदेही के चलते, महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक सीधे तौर पर इन्हें आरोपी नहीं बनाया है। 

ये भी पढ़ें: Explainer: तिरुपति मॉडल को क्यों बताया जा रहा राम मंदिर चंदा चोरी का हल, यहां कैसे रखते हैं हर पाई का हिसाब?

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की क्या पहचान?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन सभी पर साजिशन धोखाधड़ी कर चढ़ावा राशि चोरी करने का आरोप है। इन सभी आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर 29 जून तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू: यह राम मंदिर ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय का बेहद करीबी और उनके ड्राइवर हैं। टिन्नू का मंदिर की हर व्यवस्था में हस्तक्षेप रहता था और दान गणना कक्ष की चाबियां भी इनके पास रहती थीं। यह इस पूरी चोरी की साजिश के एक अहम किरदार हैं।

सुभाष श्रीवास्तव: यह चढ़ावा गणना इंचार्ज थे और गिनती की पूरी प्रक्रिया इनकी निगरानी में होती थी। जांच में सामने आया है कि टिन्नू की शह पर सुभाष ने ही चोरी के खेल में अन्य लोगों को जोड़ा था, क्योंकि गणना में किसकी ड्यूटी लगेगी, यह तय करने का जिम्मा सुभाष के पास ही था।

ये भी पढ़ें: Explainer: राम मंदिर में चढ़ावे का अर्थशास्त्र; कितना दान, कहां खर्च और कैसे चली लूट? 10 ग्राफिक्स में समझें
विज्ञापन

अनुकल्प मिश्रा: यह ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के रिश्तेदार हैं और आरोपी लवकुश मिश्रा के जीजा हैं। इनकी ड्यूटी चढ़ावा गणना में लगाई गई थी और इनके घर से चोरी की रकम बरामद हुई है।

लवकुश मिश्रा: यह भी डॉ. अनिल मिश्रा के रिश्तेदार हैं। इनकी ड्यूटी भी चढ़ावा गिनने में लगती थी। इनके घर से भी कथित तौर पर चोरी की गई 10 लाख रुपये नकद रकम बरामद हुई है। 

मनीष यादव: यह मुख्य आरोपी टिन्नू यादव के भतीजे हैं, जिन्हें गणना प्रक्रिया में शामिल किया गया था। इनके पास से भी चोरी की रकम बरामद की गई है।

अविनाश शुक्ला: इनकी ड्यूटी भी चढ़ावे की गणना में लगती थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके बैंक खाते से पांच लाख रुपये बरामद होने की चर्चा है।

करुणेश पांडेय: यह अनुकल्प और लवकुश के साथ इस पूरी साजिश में शामिल थे।

रमाशंकर मिश्र: यह भी अनुकल्प और लवकुश के साथ मिलकर रकम पार करने की साजिश का हिस्सा था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें