विश्व दिव्यांग दिवस (तीन दिसंबर) के मौके पर श्री स्वामीनारायण संप्रदाय ने मानव सेवा के असली मर्म को चरितार्थ किया और 711 दिव्यांगों को कृत्रिम हाथ-पैर देकर उनका दैनिक जीवन आसान कर दिया। श्री स्वामीनारायण संप्रदाय के प्रमुख आध्यात्मिक गुरू आचार्य राकेश प्रसाद महाराज ने गुजरात के वड़ताल में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान कहा कि भगवान स्वामी नारायण का दूसरा नाम सहजानंद स्वामी है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों को कृत्रिम हाथ-पैर देकर उनका दैनिक जीवन सहज बनाकर उनका जीवन सहज करने का कार्य किया गया है। यह श्री स्वामीनारायण के नाम और उनके जीवन के उच्च आदर्शों को सही मायने में चरितार्थ करता है। भगवान स्वामी नारायण के दूसरे नाम भगवान सहजानंद के अनुरूप लोगों के जीवन को सहज बनाना ही असली मानवता है।
उन्होंने कहा कि आज के कार्यक्रम के जरिए सैकड़ों दिव्यांगों को पैर देकर ‘साधु तो चलता भला’ वाली कहावत को आज ‘साधु तो चलाता भला’ बना बना दिया गया है। इससे बड़ी मानव सेवा और कुछ दूसरी नहीं हो सकती, जहां एक सेवा कार्य के जरिए सैकड़ों लोगों को चलने-फिरने और अपना कामकाज स्वयं करने की शक्ति दे दी गई है। उन्होंने कहा कि यदि इसी प्रकार समाज के लोग दूसरों के हितों की चिंता करें तो यह मानव जीवन बेहद सहज और आदर्श बनाया जा सकता है। आनंदमय जीवन जीने का यही सबसे आसान सूत्र हो सकता है।
संप्रदाय इस तरह के कार्यक्रम लगातार आयोजित करता रहता है, जिसमें समाज के निःशक्त जनों की सेवा के साथ-साथ प्रकृति की भी चिंता की जाती है। संप्रदाय वृक्षारोपण कार्यक्रम कर इस धरती को भी बचाने के लिए अपने स्तर पर प्रयास करता रहता है। इसके अलावा ठंड के समय गरीबों में कंबल वितरण और समय-समय पर भोजन वितरण भी करता रहता है। कोरोना काल में संस्थान ने लाखों गरीब और जरूरतमंद लोगों को तैयार और सूखा राशन उपलब्ध कराकर मानवता के लिए बड़ा कार्य किया था।
श्री स्वामी नारायण संप्रदाय, वड़ताल गद्दी के आचार्य राकेश प्रसाद जी के आशीर्वाद से आयोजित इस कार्यक्रम को एक कदम दिव्यांग सेवा की ओर नाम दिया गया था। इस सेवा कार्य में 180 डॉक्टर, 50 नर्स और 500 स्वयं सेवकों ने भाग लिया। हेल्पिंग हैंड फॉर ह्यूमनिटी संस्थान के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में माधवप्रिय स्वामी, नौतन स्वामी और ज्ञान स्वामी भी उपस्थित रहे।