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सियासी पिच पर स्विंग की कोशिश में श्रीसंत

Sun, 08 May 2016 12:06 PM IST
सुदीप ठाकुर/ अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम, केरल
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श्रीसंत को विश्वास इस बार उनके बूते भाजपा को यहां मिलेगी जीत - फोटो : अमर उजाला
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केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से भाजपा उम्मीदवार क्रिकेटर श्रीसंत की जिंदगी काफी बदल गई है। अब वे रोज सुबह अखबार के स्पोर्ट्स पेज के बजाए फ्रेंट पेज पढ़ने लगे हैं। मगर सियासी पिच पर गेंद को स्विंग कराना आसान नहीं। इसका एहसास उन्हें शनिवार सुबह उस वक्त हुआ जब वह शहर के पश्चिमी हिस्से में स्थित षणमुगम बीच से सटी बस्सी में जनसंपर्क के लिए निकले। यहां उनका सामना यूडीएफ के एक कट्टर समर्थक स्टीफंस से हो गया, जिसने उनके मुंह पर कहा कि यहां से जाइये, यहां भाजपा को वोट नहीं मिलेगा। उसके इतना कहते ही श्रीसंत कुछ तल्ख हो गए। बड़ी मुश्किल से अपने गुस्से को काबू करते हुए श्रीसंत ने अपने साथ चल रहे अपने एक करीबी साथी से धीरे से कहा, कोई और जगह होती तो मैं उसे थप्पड़ मार देता! अब वे अगली गली में हैं। गुस्से को पूरी तरह से काबू कर लिया है। एक एक घर में दस्तक दे रहे हैं और हाथ जोड़कर कहते हैं, इस बार मुझे वोट देना।
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केरल को क्रिकेट में अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले 33 वर्षीय गेंदबाज श्रीसंत का आकर्षण अभी कम नहीं हुआ है। महिलाएं, बच्चे और युवा उनसे हाथ मिलाने और सेल्फी खिंचवाने के लिए बेताब नजर आते हैं। एक बच्चा थोड़ा रूठ गया है, क्योंकि शायद फोटो सही नहीं आई। श्रीसंत उसे मनाने की कोशिश कर रहे हैं। 



क्रिकेट से कितनी अलग है सियासत? इस संवाददाता के सवाल पर वह कुछ दार्शनिक हो जाते हैं। कहते हैं, 'मैं क्रिकेट से प्रेम करता हूं। टीम गेम होने के बावजूद उसमें निजी संतुष्टि के लिए जगह होती है। लेकिन राजनीति में अपनी संतुष्टि की जगह नहीं है। यहां आपको हर व्यक्ति की जरूरतों को संतुष्ट करना पड़ता है। लोग मुझसे कहते हैं कि आपने देश के लिए खेला है, हम आपका समर्थन करेंगे। इसमें हिंदू, सिख और ईसाई हर बिरादरी के लोग हैं।'
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अमर उजाला से बात करते हुए ही अब वह हलीमा बीबी के सामने हैं। 'अम्मा वोट देना।' अम्मा के चेहरे पर श्रीसंत को देखकर चमक आ जाती है। अम्मा से पूछो तो कहती है, 'श्रीसंत बहुत अच्छा है।'   वह यहां की तंग गलियों में घूम रहे हैं। अमर उजाला से बातचीत का सिलसिला भी जारी है। हर सवाल पर वह प्रधानमंत्री मोदी का नाम लेना नहीं भूलते। कहते हैं, 'मैं यहां प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों के कारण आया हूं। भाजपा ही ऐसी पार्टी है, जिसमें मोदी जी जैसे आम आदमी प्रधानमंत्री बन सकते हैं।'  तिरुवनंतपुरम सेंट्रल सीट से यूडीएफ के दिग्गज और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री वीएस शिव कुमार और एलडीएफ के एंटोनी राजा भी मैदान में हैं।क्या आप इस मुकाबले को त्रिकोणीय बना पाएंगे? इस पर पूरे आत्मविश्वास के साथ वह कहते हैं, यहां कोई मुकाबला ही नहीं, भाजपा जीतेगी। एक बार यहां भाजपा की सरकार बन जाए तो तेजी से विकास होगा।

श्रीसंत के पिता कभी कट्टर कम्युनिस्ट थे। उनकी एक रिश्ते की बहन डॉ. टी एन सीमा बगल की तिरुवनंतपुरम सीट से माकपा की उम्मीदवार भी हैं। मगर श्रीसंत के निशाने पर अब लेफ्ट पार्टी है। कहते हैं, लेफ्ट तो खत्म हो गया है। उनकी विचारधारा का क्या हुआ। देखिये बंगाल में तो वह कांग्रेस के साथ भाई बहन जैसे एक साथ हैं और यहां कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।   



आईपीएल में फिक्सिंग के आरोपों की वजह से जेल तक जा चुके श्रीसंत को भरोसा है कि उन्होंने क्रिकेट को जो कुछ दिया है उसकी वजह से लोग उन्हें वोट देंगे। कहते हैं, 'इस बस्ती का हाल देखिये। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा एक किलोमीटर दूर है, लेकिन यहां गंदगी का अंबार है। आप बताइये यहां से कोई बच्चा किक्रेटर क्यों नहीं बन सकता। मैं खुद जिस जगह पला बढ़ा वहां 1985 के बाद बिजली आई।'  यह बस्ती ईसाई और मुस्लिम बहुल है। ज्यादातर घरों को देखो तो एहसास होता है कि यहां निम्न मध्यम वर्गीय लोगों की बहुतायत है। 'इधर तो पांच साल यूडीएफ चलता और फिर पांच साल एलडीएफ। यह केरला का स्टाइल है।' यह टिप्पणी युवा न्यूज पेपर हॉकर निजाम की है। तो क्या इस वार्ड से श्रीसंत को वोट नहीं मिलेगा? थोड़ी देर पहले श्रीसंत से हाथ मिले चुके थामस कहते हैं, 'नहीं ऐसी बात नहीं है।' 
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