पत्नी की हत्या मामले में सजा काट रहे स्वामी श्रद्धानंद उर्फ मुरली मनोहर मिश्रा की दया याचिका को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी। केंद्र ने कहा कि पत्नी की हत्या के आरोप में 30 साल से जेल की सजा काट रहे श्रद्धानंद की दया याचिका में राष्ट्रपति से अपील करने का अनुरोध किया गया है।
न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने 84 वर्षीय श्रद्धानंद उर्फ मुरली मनोहर मिश्रा की दया याचिका पर सुनवाई की। मामले में केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि याचिका में राष्ट्रपति से अपील करने का अनुरोध किया गया है। क्या ऐसी याचिका पर विचार किया जा सकता है? कृपया याचिका पर गौर किया जाए।
इस पर पीठ ने कहा कि श्रद्धानंद को अदालत को धन्यवाद देना चाहिए कि उस बार आप बच गए। अब पीठ ने सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित कर दी। श्रद्धानंद के वकील वरुण ठाकुर ने कहा कि याचिकाकर्ता 30 साल से अधिक समय से जेल में है और बीमारियों से पीड़ित है।जुलाई 2008 में सर्वोच्च न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने श्रद्धानंद की मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया और निर्देश दिया कि उसे उसके जीवनकाल में जेल से रिहा नहीं किया जाएगा।
पिछले साल अक्तूबर में सुप्रीम कोर्ट ने श्रद्धानंद की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। इसमें उन्होंने शीर्ष अदालत के उस फैसले की समीक्षा की मांग की थी जिसमें उन्हें जीवनभर जेल से रिहा न करने का निर्देश दिया गया था। श्रद्धानंद ने सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की पीठ से जुलाई 2008 के फैसले की समीक्षा की मांग की थी।
श्रद्धानंद की पत्नी शाकेरेह मैसूर रियासत के पूर्व दीवान सर मिर्जा इस्माइल की पोती थीं। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2008 के अपने फैसले में कहा कि दंपती की शादी अप्रैल 1986 में हुई थी लेकिन मई 1991 में शाकेरेह अचानक गायब हो गईं। मार्च 1994 में केंद्रीय अपराध शाखा, बंगलूरू ने शाकेरेह की 'गुमशुदगी' की शिकायत की जांच अपने हाथ में ले ली थी। पूछताछ में श्रद्धानंद ने उसकी हत्या करने की बात कबूल कर ली थी।
राजीव गांधी हत्याकांड का जिक्र
सर्वोच्च न्यायालय में दायर अपनी नई याचिका में श्रद्धानंद ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के दोषियों को समयपूर्व रिहा किए जाने की दलील भी दी। हत्याकांड में दोषी पाए गए कुछ दोषियों को भी आजीवन कारावास की सजा हुई थी, लेकिन अदालत के आदेश के बाद उनकी समयपूर्व रिहाई हुई है। याचिका में श्रद्धानंद की समीक्षा याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पिछले वर्ष 23 अक्तूबर को पारित आदेश का हवाला दिया गया।
इसमें कहा गया है कि शीर्ष अदालत ने इस बात पर गौर किया है कि संविधान पीठ के मुताबिक राष्ट्रपति को अनुच्छेद 72 के तहत और राज्यपाल को अनुच्छेद 161 के तहत शक्तियों का प्रयोग करने का अधिकार है, जबकि अदालत ने मृत्युदंड के विकल्प के रूप में आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक की सजा का प्रावधान किया है। संविधान के अनुच्छेद 72 और 161 में राष्ट्रपति और राज्यपाल को क्षमादान आदि देने तथा कुछ मामलों में सजा को निलंबित करने, माफ करने या कम करने की शक्ति का उल्लेख है।
श्रद्धानंद ने बताया कि उन्होंने दिसंबर 2023 में राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता 30 साल से एक भी दिन की पैरोल या किसी छूट के बिना जेल में है। याचिका में प्रतिवादी प्राधिकारियों को उसकी दया याचिका पर निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की गई है।