उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के मुद्दे पर शिवसेना ने भी भाजपा पर निशाना साधा है। शिवसेना ने अपने सहयोगी दल की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा ने नैतिकता के नाम पर ‘लोकतंत्र का गला घोंट’ दिया है। इससे देश में अस्थिरता और अराजकता का माहौल पैदा हो सकता है।
उत्तराखंड संकट पर शिवसेना ने पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में लिखा है, ‘भाजपा ने उत्तराखंड सरकार को अस्थिर करने के लिए कांग्रेस के नौ बागी विधायकों का इस्तेमाल किया। यदि रावत सरकार बहुमत खो चुकी थी, तो इसका फैसला राज्य विधानसभा में होना चाहिए था। राज्यपाल ने सरकार को 28 मार्च तक बहुमत साबित करने का समय दिया था लेकिन उससे एक दिन पहले राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।’
शिवसेना ने पूछा है कि भाजपा ने इससे क्या हासिल कर लिया? हम कांग्रेस के भ्रष्ट कृत्यों के खिलाफ हैं, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता में आई सरकार को लोकतांत्रिक तरीके से ही हटाया जाना चाहिए। शिवसेना ने कहा कि पहले अरुणाचल प्रदेश उसके बाद उत्तराखंड से कांग्रेस की सरकार हटाई गई। 80 के दशक में कांग्रेस ने भी कई राज्यों में विरोधी सरकारों को अपने बलबूते हटाया था। शिवसेना ने कहा है कि कांग्रेसी राह पर चलकर भाजपा ने भी स्वयं का कांग्रेसीकरण कर लिया है। अब यह भी कहा जा रहा है कि इसके बाद हिमाचल प्रदेश और मणिपुर का नंबर लगेगा।
महाराष्ट्र में भाजपा के साथ गठबंधन पर सफाई देते हुए मुखपत्र में शिवसेना ने लिखा है कि भाजपा के साथ उसका गठबंधन अस्थायी है और यह राजनीतिक जरूरत है। इस गठबंधन में नैतिकता या अनैतिकता का कोई सवाल नहीं है।