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'अरुणाचल में चीन की घुसपैठ छिपा रही सरकार': सामना के संपादकीय में दावा, केंद्र पर लगाए और क्या गंभीर आरोप?

Mon, 26 Oct 2026 11:29 AM IST
देवेश त्रिपाठी आईएएनएस, मुंबई

सार

शिवसेना यूबीटी ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में अरुणाचल प्रदेश सीमा पर चीनी घुसपैठ से जुड़े दावों को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। संपादकीय में आईटीबीपी महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर की कथित टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए भारतीय क्षेत्र में चीनी सैनिकों की मौजूदगी और सैन्य शिविरों के दावे किए गए हैं।
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अरुणाचल में चीनी घुसपैठ के दावों पर शिवसेना यूबीटी ने उठाए सवाल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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शिवसेना (यूबीटी) ने अरुणाचल प्रदेश सीमा पर चीनी घुसपैठ को लेकर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर की कथित टिप्पणियों के बाद केंद्र सरकार से राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल किए हैं। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित संपादकीय में उद्धव ठाकरे गुट ने दावा किया कि इन खुलासों ने सरकार के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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संपादकीय में आरोप लगाया गया कि सुरक्षा से जुड़ी सच्चाई को दबाने की कोशिश की जा रही है और राष्ट्रीय नेतृत्व इस मामले में जवाबदेही से बच रहा है। संपादकीय के अनुसार, आईटीबीपी महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने हाल ही में खुलासा किया कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश की सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में छह से सात किलोमीटर तक अंदर घुस आए और असफिला इलाके में सैन्य शिविर स्थापित किए।

सामना के संपादकीय में क्या दावा?
संपादकीय में यह भी दावा किया गया कि पिछले चार महीनों से सीमा पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच सशस्त्र झड़पें जारी हैं। इसमें कहा गया कि ड्रोन के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के कारण आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और तकनीक के मामले में चीन की सेना आगे है। 
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संपादकीय के मुताबिक, इन टिप्पणियों के बाद लोगों में चिंता बढ़ी और अधिकारी के भाषण का आधिकारिक वीडियो जल्द ही वेबसाइट से हटा दिया गया। शिवसेना यूबीटी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार इन घटनाक्रमों को जनता से छिपाने की कोशिश कर रही है।

राहुल गांधी और स्थानीय लोगों के दावों का भी किया जिक्र
'सामना' के संपादकीय में कहा गया कि चीनी घुसपैठ से जुड़ी जानकारी सामने लाने की कोशिश करने वालों को निशाना बनाया गया है। संपादकीय में कहा गया, "लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक साल पहले चेतावनी दी थी कि चीन अरुणाचल प्रदेश में घुसपैठ कर रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह समेत शीर्ष नेताओं ने उनके बयानों को झूठा प्रचार बताते हुए खारिज कर दिया और उन्हें दोषी ठहराया।"

संपादकीय के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश के दूरदराज इलाकों में रहने वाले स्थानीय जनजातीय समुदायों और चीनी घुसपैठ से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने वाले युवाओं की बातों को भी दबाया गया। इसमें आरोप लगाया गया कि सरकार ने उनके दावों को दुश्मन का प्रचार बताकर खारिज कर दिया।

पूर्व सेना प्रमुख की किताब का भी जिक्र
संपादकीय में पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' का भी जिक्र किया गया। इसमें दावा किया गया कि 2020 में लद्दाख-गलवान में हुई झड़पों और अग्निपथ योजना से जुड़े मुद्दों के कारण किताब को सरकारी स्तर पर सेंसरशिप का सामना करना पड़ा है। संपादकीय के मुताबिक, किताब में बताया गया है कि 31 अगस्त 2020 की रात जब चीनी टैंक आगे बढ़ रहे थे, तब जनरल नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से सैन्य कार्रवाई को लेकर स्पष्ट निर्देश मांगे थे।

संपादकीय में किताब के हवाले से दावा किया गया कि प्रधानमंत्री से चर्चा के बाद रक्षा मंत्री ने कथित तौर पर अस्पष्ट जवाब दिया था, "आपको जो उचित लगे, वह कीजिए।" इस स्थिति को किताब में एक मुश्किल और जोखिम भरी जिम्मेदारी बताया गया था, जिसे 'हॉट पोटैटो' कहा गया।

सोनम वांगचुक का भी किया जिक्र
संपादकीय में पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का उल्लेख करते हुए कहा गया कि लद्दाख में चीनी घुसपैठ की ओर ध्यान दिलाने के बाद उन्हें सरकार की ओर से "देशद्रोही" करार दिया गया। शिवसेना यूबीटी ने आशंका जताई कि सच्चाई सामने रखने के कारण आईटीबीपी महानिदेशक को भी इसी तरह की राजनीतिक आलोचना का सामना करना पड़ सकता है।

चीन के साथ कूटनीतिक मुलाकातों पर भी सवाल
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने सीमा पर सैन्य झड़पों और राजधानी में चीन के साथ कूटनीतिक गतिविधियों के बीच अंतर को रेखांकित किया। संपादकीय में दावा किया गया कि जब अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सैनिक चीनी सैनिकों के साथ झड़पों में उलझे हुए थे, उसी समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मेजबानी कर रहे थे। संपादकीय ने इन दोनों घटनाओं के एक साथ होने को सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों के बलिदान और चोटों का अपमान बताया।

पुलवामा और पहलगाम हमलों का भी उठाया मुद्दा
शिवसेना यूबीटी ने सत्तारूढ़ नेतृत्व पर आरोप लगाया कि संकट के समय सैनिकों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जाता है और बाद में उन्हें अकेला छोड़ दिया जाता है। संपादकीय में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी पुलवामा हमला, पहलगाम में हुआ नरसंहार और अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ के मौजूदा दावों समेत प्रमुख सुरक्षा विफलताओं की जवाबदेही से बचते रहे हैं। संपादकीय के अनुसार, देश की सीमाओं की रक्षा करने में विफल रहने वाले नेतृत्व को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
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