अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री को जालना जाना था और अंतरवली सराटी गांव में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर 29 अगस्त से भूख हड़ताल पर बैठे जरांगे से मिलना था, लेकिन वह इस योजना पर आगे नहीं बढ़े। सूत्रों ने बताया कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार भी कार्यकर्ता से मिलने जालना नहीं गए, बल्कि कुछ अन्य मंत्री उनसे मुलाकात करेंगे।
मंगलवार की देर रात पत्रकारों से बात करते हुए जरांगे ने कहा था कि वह चाहते हैं कि मुख्यमंत्री उनसे मिलने के लिए आएं ताकि वह अपना अनशन वापस ले सकें। बुधवार को शिंदे ने एक बयान में कहा कि उनकी सरकार आरक्षण के मुद्दे पर ठोस कदम उठा रही है और फैसला ले रही है। उन्होंने कहा, सोशल मीडिया पर स्थितियों और बातचीत को तोड़-मरोड़कर राज्य की छवि खराब करना सही नहीं है।
शिंदे ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर सोमवार को सर्वदलीय बैठक के बाद वह अपने उप मुख्यमंत्रियों देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार से बैठक में जो कुछ भी हुआ, उस पर सकारात्मक रूप से बात करने के बारे में बात कर रहे थे।उन्होंने कहा, 'लेकिन हमारी बातचीत को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश किया गया। यह शरारतपूर्ण है और लोगों के मन में संदेह पैदा करता है।'
शिंदे ने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए गलतफहमी पैदा करना और सरकार की छवि खराब करना हमारे राज्य की संस्कृति नहीं है। सोमवार की सर्वदलीय बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन शुरू होने से पहले शूट किए गए एक वायरल वीडियो में शिंदे फडणवीस और पवार से पूछते दिख रहे हैं, हमें बस बोलने और जाने की जरूरत है, है ना?
अजित पवार तुरंत जवाब देते हैं-हां, ठीक है। फडणवीस को शिंदे के कान में फुसफुसाते हुए और इशारा करते हुए देखा गया कि माइक्रोफोन चालू है। पवार को भी यही संकेत देते देखा गया। कुछ विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि इन शब्दों से आरक्षण के मुद्दे से निपटने के लिए गंभीरता की कमी का संकेत मिलता है।
बुलढाणा में व्यक्ति ने खुदकुशी करने की कोशिश की
पूर्वी महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में मराठा आरक्षण के समर्थन में एक मार्च निकाले जाने की तैयारी के बीच 40 वर्षीय शख्स ने खुदकुशी करने के प्रयास के तहत एक स्टेडियम की गैलरी से कूदने की कोशिश की। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारी बुलढाणा जिले के कंडारी गांव का रहने वाला संभाजी भाकरे है और उसे हिरासत में ले लिया गया है। घटना दोपहर करीब 12.30 बजे बोराखेड़ी में हुई, जहां मराठा समुदाय के सदस्य सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की अपनी मांग के समर्थन में मार्च निकालने के लिए एक स्टेडियम में एकत्र हुए थे।