12 सिंतबर 2015 को हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के करीब 1.78 लाख शिक्षामित्रों का सहायक शिक्षक के तौर पर किया गया समायोजन निरस्त कर दिया था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। जुलाई, 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने अच्छी शिक्षा के लिए पढ़े-लिखे शिक्षकों की नितांत आवश्यक बताते हुए उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षकों के तौर पर किए समोजन को निरस्त करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया था।
हालांकि उस फैसले में शिक्षामित्रों के लिए राहत की बात यह थी कि शीर्ष अदालत ने कहा था कि अगर ये शिक्षामित्र टीईटी (सहायक शिक्षक के लिए जरूरी अहर्ता) पास हैं या भविष्य में पास कर लेते हैं तो सहायक शिक्षकों के लिए होने वाली दो नियुक्ति प्रक्रिया में उन पर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा था कि यह राज्य सरकार पर निर्भर है कि वह चाहे तो समायोजन के पूर्व की स्थिति में शिक्षामित्रों की सेवा जारी रख सकती है।