प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि मैं सोशल मीडिया से जुड़ा हुआ इंसान हूं, इसलिए मुझे जो सूचना परोसी जाती है मैं उसका शिकार नहीं हूं जो सूचना मुझे चाहिए, वह मैं खोज लेता हूं। प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं के मद्देनजर अहम है। उन्होंने मैं नहीं हम मोबाइल ऐप्लीकेशन और वेब पोर्टल का शुभारंभ के मौके पर आईटी पेशेवरों को संबोधित करते हुए यह कहा। साथ ही स्पष्ट किया कि सरकार के पास ढेरों योजनाएं और बजट होते हैं पर उनका सफल होना और नहीं होना जन भागीदारी पर निर्भर करता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय युवा तकनीक की ताकत का शानादर तरीके से लाभ उठा रहे हैं। वह ना केवल अपने लिए तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, बल्कि दूसरों का भला भी कर रहे हैं। यह समाज में एक अच्छा संदेश देता है। उन्होंने कहा कि हमें दुनिया की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा, क्योंकि आज हम नेतृत्वकर्ता के रूप में देखे जा रहे हैं।
पेशेवरों से बातचीत के दौरान स्वच्छ भारत अभियान का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि इसके चिन्ह में बापू का चश्मा दिखाया गया है। वह हमारे लिए प्रेरणा हैं और हम उनके सपने को पूरा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिक लोग टैक्स चुका रहे हैं, क्योंकि उन्हें यकीन है कि उनका पैसा सही तरीके से समाज के कल्याण के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
उसके मन में संतोष के लिए एक तड़पन रहती है
PM Modi
पीएम ने कहा कि कोई भी इंसान अपनी करिअर में कितना भी आगे चला जाए, वैभव कितना भी प्राप्त कर ले या पद प्राप्त कर ले। लेकिन उसके मन में संतोष के लिए एक तड़पन रहती है। मैंने अनुभव किया है कि सबकुछ प्राप्त होने के बाद वह किसी और के लिए कुछ करता है, जीने का प्रयास करता है । उस समय उसका संतोष का स्तर बढ़ जाता है।
उद्योगपति अजीम प्रेमजी का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि अब वह अभियान की चर्चा करते हैं। मैं अनुभव करता हूं कि जीवन में इस पढ़ाव पर उन्होंने संतोष सेवा से मिलता है। एक वैज्ञानिक पूरा जीवन लगाकर खोज कर लोगों की सहायता करता है। सामाजिक कार्य में उसका भी महत्व है, क्योंकि वह सबको लाभ देगा। स्वांत: सुखाय, कुछ लोग यह करते हैं, क्योंकि इससे आनंद मिलता है।
रामायण की एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हम रामायण में सुनते हैं कि एक गिलहरी रामसेतु के निर्माण में राम के साथ जुड़ गई थी। लेकिन एक गिलहरी ने तो प्रेरणा पाकर जुड़ी पर दूसरा दृष्टिकोण होता है कि राम जी को भी गिलहरी की जरूरत पड़ती है। इसी तरह से सरकार जितने भी कदम उठाती है उसमें जन- जन की भागीदारी सबसे अहम है। हम जो परिणाम चाहते हैं हिन्दुस्तान इंतजार नहीं करेगा, दुनिया उसकी ओर देख रही है। अगर यह करना है तो जन सामान्य के जीवन में बदलाव लाकर होगा।
आईटी मंत्रालय के मुताबिक मैं नहीं हम ऐप और पोर्टल की मदद से सूचना प्रौद्योगिकी का फायदा समाज के कमजोर तबके तक पहुंचाने के लिए परस्पर सहयोग के प्रयास में गति लायी जाएगी। गौरतलब है कि वैसे मैं नहीं हम नारा साल 2014 के आम चुनाव के दौरान कांग्रेस ने दिया था। राहुल गांधी की तस्वीरों के साथ इस नारे का प्रचार-प्रसार किया गया था।