सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ में छांव फाउंडेशन द्वारा एसिड अटैक पीड़िताओं के लिए चलाए जा रहे शीरोज हैंगआउट कैफे को हटाने के लिए नौ महीने का वक्त दिया है। इस दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट को इस मामले का निपटारा करने के लिए कहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्ववर्ती सपा सरकार द्वारा एनजीओ छांव फाउंडेशन को दिए गए एसिड पीड़िताओं द्वारा संचालित कैफे की जगह को खाली करने का आदेश दिया था। सरकार ने जगह खाली करने के लिए 30 अक्तूबर तक की मोहलत दी थी। इस पर पीड़िताओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
पूर्व सपा सरकार ने मौखिक रूप से यह सरकारी जमीन एसिड अटैक पीड़िताओं को दी थी। इसे लेकर कोई लिखित आदेश नहीं था। पीड़िताओं का कहना है कि उनकी आजीविका कैफे पर निर्भर है। लखनऊ के गोमती नगर स्थित इस कैफे में 15 एसिड अटैक पीड़िताएं काम करती हैं।