बेटी शीना बोरा की हत्या की मुख्य आरोपी इंद्राणी मुखर्जी शुक्रवार को जमानत की प्रक्रिया पूरी कर लगभग सात साल बाद जेल से बाहर आ गई। जेल से बाहर आने के बाद इंद्राणी ने कहा कि खुले आसमान में आकर वह बहुत खुश है। अभी आगे की कोई योजना नहीं है, केवल घर जाना है।
शीना बोरा हत्याकांड काफी चर्चित रहा। यह एक ऐसा मामला था, जिसमें मां पर ही अपनी बेटी की हत्या करने का आरोप लगा। शीना बोरा की हत्या साल 2012 में हुई थी। तीन साल बाद 25 अगस्त, 2015 में मुखर्जी को तब गिरफ्तार किया गया, जब उसके ड्राइवर श्यामवर राय ने मामले का खुलासा किया। इसके बाद से इंद्राणी मुखर्जी को मुंबई की भायखला महिला कारागार में बंद किया गया। इस हाई प्रोफाइल हत्या कांड में शीना की मां इंद्राणी, उनके पहले पति संजीव खन्ना और दूसरे पति रहे पीटर मुखर्जी पर आरोप लगे थे।
बड़ा मामला होने के कारण 18 सितंबर, 2015 को इसे सीबीआई को सौंप दिया गया। साल 2019 में इंद्राणी और पीटर में तलाक भी हो गया था। वहीं, साल 2020 में पीटर मुखर्जी को जमानत मिल गई। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने छह साल से अधिक समय से जेल में रहने के आधार पर इंद्राणी मुखर्जी को जमानत दे दी। साथ ही, सीबीआई कोर्ट को निर्देश दिया था कि वह जमानत की शर्तें तय करें। इंद्राणी को विशेष सीबीआई अदालत ने दो लाख के मुचलके पर जमानत दी।
ये था मामला
शीना बोरा दरअसल, इंद्राणी मुखर्जी और उनके पहले पति संजीव खन्ना की बेटी थी, जिसकी साल 2012 में 24 अप्रैल को गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी और उसके शव को जला दिया गया था। शीना को इंद्राणी अपनी बहन बताती थी। बताया गया है कि इंद्राणी के दूसरे पति पीटर के बेटे से शीना की नजदीकियां थी, जो रिश्ते में उसका सौतेला भाई लगता था। यह रिश्ता उसकी मौत की वजह बना। करीब तीन साल तक पुलिस मामले की तहकीकात में जुटी रही, लेकिन कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा। 2015 में पुलिस को ड्राइवर के खुलासे से केस सुलझाने में मदद मिली थी।