यशवंत सिन्हा ने कहा कि वह इस मंच को उसी दिन शुरू कर रहे हैं जिस दिन 70 वर्ष पहले महात्मा गांधी की हत्या हुई थी। उन्होंने कहा कि उस समय की तरह ही आज भी लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाएं खतरे में हैं।
मौजूदा सरकार ने किसानों को भिखारी बना दिया है और वह अपनी सुविधानुसार आंकड़े जुटा लेती है। सरकार खाद्यान्न पर आयात शुल्क तब बढ़ाती है जब किसान अपनी फसल बाजार में औने पौने दाम पर बेच चुका होता है।
वहीं इसी मोर्चे से जुड़े तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय रेल राज्यमंत्री दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि किसान मोर्चा का गठन भी इसी तरह चंद लोगों द्वारा किया गया था लेकिन धीरे-धीरे वह एक देशव्यापी आंदोलन बना और राजनीतिक दल में बदल गया।
उनके अलावा इस कार्यक्रम में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री सुरेश मेहता, आम आदमी पार्टी के नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य संजय सिंह, कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन, सोमपाल शास्त्री, पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी, मोहम्मद अदीब, पवन वर्मा, जयंत चौधरी और बिहार के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी मौजूद थे।