राज्यसभा में इस बार जदयू के शरद यादव की वापसी पर संशय बरकरार है। जदयू के पांच सदस्य रिटायर हो रहे हैं जबकि अब उसके हिस्से सिर्फ दो सीटें आने वाली हैं। के सी त्यागी को दोबारा टिकट मिलने के आसार कम हैं। उधर राजद से पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव की पत्नी बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का राज्यसभा आना तय माना जा रहा है। लालू अपनी बेटी मीसा भारती को भी राज्यसभा भेज सकते हैं।
भाजपा के हिस्से में बिहार से एक सीट आएगी। इस पर सुशील मोदी की दावेदारी सबसे भारी है। उन्हें राज्यसबा सदस्य बनाकर केंद्र में मंत्री का ओहदा भी दिया जा सकता है। रिटायर होने वाले सभी केंद्रीय मंत्रियों की वापसी तय मानी जा रही है। जदयू से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी रामचंद्र सिन्हा भी रिटायर हो रहे हैं। उनकी वापसी लगभग तय मानी जा रही है। बिहार चुनाव में प्रचार की कमान संभालने वाले प्रशांत किशोर का नाम भी राज्यसभा के लिए चर्चा में है। जदयू के 71 विधायक हैं और कांग्रेस के समर्थन से उसेक दो सदस्य राज्यसभा आ सकते हैं। लालू के पास बिहार विधानसभा में 80 सीटें हैं इसलिए राजद के कोटे से राज्यसभा की दो सीटें भरी जाएंगी। भाजपा के पास 53 विधायक हैं और उसकी एक सीट पक्की है।
राज्यसभा के खाली हो रही 57 सीटों को 15 राज्यों से भरा जाना है। भाजपा सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल महाराष्ट्र से राज्यसभा में आ सकते हैं। रेल मंत्री सुरेश प्रभु का हरियाणा से राज्यसभा में आना तय माना जा रहा है। मंत्री बीरेन्द्र सिंह की भी हरियाणा से ही वापसी लगभग तय है। इसी तरह केंद्रीय मंत्री वैंकेया नायडू, निर्मला सीतारमन, मुख्तार अब्बास नकवी की वापसी भी तय मानी जा रही है। पत्रकार एम जे अकबर और तरुण विजय की वापसी पर संशय कायम है। भाजपा को राजस्थान से सभी चार सीटें मिलने की उम्मीद है। बसपा के छह सदस्य रिटायर हो रहे हैं लेकिन अब इस पार्टी के दो सदस्य ही राज्यसभा आ सकते हैं। बसपा से सतीश चंद्र मिश्रा की वापसी तय मानी जा रही है।
भाजपा के 14 सदस्य रिटायर हो रहे हैं। माना जा रही है कि भाजपा को इस बार तीन सीटों का फायदा होगा। इस तरह भाजपा की राज्यसभा में सदस्यों की संख्या 49 से बढ़कर 53 पर पहुंच सकती है। महाराष्ट्र से कांग्रेस के प्रवीण राष्ट्रपाल का निधन हो चुका है। वह सीट भी भाजपा के खाते में जा सकती है। कांग्रेस की राज्यसभा में वर्तमान संख्या सदस्य संख्या 64 है जो घटकर 60 पर पहुंच सकती है। इस तरह राज्यसभा में कांग्रेस और भाजपा के बीच सात सीटों का अंतर रह जाएगा।