ये विवाद पिछले महीने तब शुरू हुआ था जब पवार के भतीजे और राकांपा के वरिष्ठ नेता अजीत पवार ने महाराष्ट्र विधानसभा में कहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज के सबसे बड़े पुत्र संभाजी 'स्वराज्य-रक्षक' थे, न कि 'धर्मवीर'। जिसके बाद भाजपा ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
शिवाजी महाराज के पुत्र शंभाजी को लेकर चल रहे विवाद के बीच राकांपा प्रमुख शरद पवार ने मंगलवार को प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि 17वीं सदी के शासक छत्रपति संभाजी महाराज को धर्मवीर कहें या स्वराज्य रक्षक, जिसे जो कहना है कह सकता है लेकिन, महापुरुषों पर विवाद नहीं होना चाहिए। उनकी ये प्रतिक्रिया भतीजे और महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता अजीत पवार से अलग है। ॉ
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शरद पवार ने आनंद दिघे का भी किया जिक्र
शरद पवार ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के राजनीतिक गुरु दिवंगत आनंद दिघे का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें धर्मवीर कहते हैं। इस पर हमें कोई आपत्ति नहीं है।
गौरतलब है कि ये विवाद पिछले महीने तब शुरू हुआ था जब पवार के भतीजे और राकांपा के वरिष्ठ नेता अजीत पवार ने महाराष्ट्र विधानसभा में कहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज के सबसे बड़े पुत्र संभाजी 'स्वराज्य-रक्षक' थे, न कि 'धर्मवीर'। जिसके बाद भाजपा ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। भाजपा ने इसे संभाजी महाराज का अपमान बताया था। इसके बाद एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाड ने बयान दिया था कि औरंगजेब क्रूर था लेकिन हिंदू विरोधी नहीं था। उनके इस बयान के बाद भाजपा ने जितेंद्र आव्हाड के खिलाफ भी हल्ला बोला है।
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एनसीपी ने मुगलशाही स्वीकार ली है : बावनकुले
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि संभाजी महाराज का अपमान करने के लिए अजीत पवार को माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने तंज कसा कि एनसीपी ने अब मुगलशाही स्वीकार कर ली है।
एकनाथ शिंदे ने दी ये प्रतिक्रिया
वहीं, इस मुद्दे पर प्रदेश के सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि 'इतिहास को मिटाने, उसे बदलने के प्रयासों की जितनी निंदा की जाए वह कम है। औरंगजेब को लेकर किसका प्यार उमड़ रहा है? जिसने छत्रपति शिवाजी महाराज को परेशान किया, कई मंदिरों को तोड़ा, हमारी माताओं-बहनों पर अत्याचार किया। ऐसे व्यक्ति के प्रति प्रेम दर्शाने वालों की मनोवृत्ति को समझा जा सकता है।'