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Maharashtra: चुनाव आयोग और स्पीकर का फैसला 'अन्यायपूर्ण', राकांपा अधिकार मामले पर बोले शरद पवार

Sat, 17 Feb 2024 03:20 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

बारामती में मीडिया से बात करते हुए शरद पवार ने कहा कि हमें ऐसे ही फैसले की उम्मीद थी। स्पीकर अपने पद की शुचिता को बरकरार रखने में असफल रहे। 
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शरद पवार(फाइल) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संस्थापक रहे शरद पवार ने शनिवार को कहा कि चुनाव आयोग और महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर का एनसीपी मामले पर दिया गया फैसला पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। शरद पवार ने कहा कि वे इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। दरअसल चुनाव आयोग ने बीते दिनों अपने फैसले में अजित पवार गुट को असली राकांपा (एनसीपी) माना था और पार्टी का चुनाव चिह्न भी अजित पवार गुट को देने का फैसला दिया था। 
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'पद की शुचिता बरकरार रखने में असफल रहे स्पीकर'
अपने गृहनगर बारामती में मीडिया से बात करते हुए शरद पवार ने कहा कि हमें ऐसे ही फैसले की उम्मीद थी। स्पीकर अपने पद की शुचिता को बरकरार रखने में असफल रहे। चुनाव आयोग और स्पीकर का फैसला अन्यायपूर्ण है। जिन्होंने पार्टी का गठन किया, उन्हें ही बाहर कर दिया गया है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। यह न्याय व्यवस्था के भी हिसाब से गलत फैसला था। पूरा देश जानता है कि पार्टी किसने बनाई। अशोक चव्हाण के भाजपा में जाने के सवाल पर शरद पवार ने कहा कि इन दिनों, कई केंद्रीय एजेंसियों का दबाव है जैसे एसीबी और ईडी। ये साफ दिख रहा है कि इनका इस्तेमाल विपक्ष के खिलाफ हो रहा है। 

मराठा आरक्षण पर कही ये बात
मराठा आरक्षण पर शरद पवार बोले कि 'सरकार को मराठा आरक्षण और जरांगे के मुद्दे पर मजबूत और सही स्टैंड लेना चाहिए।' बता दें कि बीते साल जुलाई में एनसीपी दो धड़ों में टूट गई थी। अजित पवार के नेतृत्व में एनसीपी के कई विधायक भाजपा-शिवसेना (शिंदे) सरकार के साथ चले गए थे और सरकार में शामिल हो गए। अजित पवार ने एनसीपी पर दावा किया था और बीते दिनों चुनाव आयोग ने भी उनके पक्ष में फैसला सुनाया है। 
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बारामती लोकसभा सीट से अजित पवार द्वारा भी अपना उम्मीदवार उतारने की चर्चाएं है। इस पर शरद पवार ने कहा कि 'लोकतंत्र में हर किसी को चुनाव लड़ने का हक है और अगर कोई अपने हक का इस्तेमाल कर रहा है तो इसमें किसी को शिकायत नहीं होनी चाहिए। हमें लोगों के सामने अपनी स्थिति रखनी चाहिए और लोग जानते भी हैं कि हमने बीते 55-60 वर्षों में क्या किया है।'
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