एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने शनिवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दबाव डालने वाली नीति का सामना करने के लिए देश के हित में मोदी सरकार का समर्थन किया जाना चाहिए। नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पवार ने कहा कि भारतीय सामान पर 50% टैरिफ लगाना ट्रंप की दबाव बनाने की रणनीति है और ऐसे समय में सभी को सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए।
पवार ने कहा कि अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाना एक सोची-समझी दबाव की नीति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फैसले से भारत के व्यापार और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। पवार का मानना है कि ऐसे समय में राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देश के हित में केंद्र सरकार का समर्थन जरूरी है।
ट्रंप की कार्यशैली पर टिप्पणी
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने ट्रंप के कार्यकाल और उनके निर्णय लेने के तरीकों पर भी टिप्पणी की। पवार ने कहा कि ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में भी बिना सोचे-समझे बयान देते थे और उनके फैसलों पर किसी का नियंत्रण नहीं होता। उन्होंने कहा कि ट्रंप के बयान और नीतियां अक्सर अचानक और अप्रत्याशित होती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर असर पड़ सकता है।
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पड़ोसी देशों से बिगड़ते रिश्ते
पवार ने मोदी सरकार को चेताया कि पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों में बढ़ती खटास को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पहले से हमारे खिलाफ है, लेकिन नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव जैसे देश भी हमसे खुश नहीं हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को कूटनीतिक प्रयास बढ़ाकर इन रिश्तों को सुधारने की दिशा में काम करना चाहिए।
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राष्ट्रीय हित में एकजुटता की अपील
पवार ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत को एकजुट होकर विदेशी दबावों का सामना करना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि देश के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए और राजनीतिक मतभेदों को इस समय पर किनारे रखना चाहिए। पवार ने यह भी जोड़ा कि विदेश नीति की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हम पड़ोसी और वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलन कैसे बनाते हैं।