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Sharad Pawar: सीएम शिंदे के अयोध्या दौरे पर बोले पवार, मंदिर की राजनीति मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश

Sun, 09 Apr 2023 01:18 AM IST
वीरेंद्र शर्मा पीटीआई, नासिक

सार

महाराष्ट्र में हिन्द मजदूर सभा के स्थापना दिवस की प्लेटिनम जयंती के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए शरद पवार ने मुंबई में मराठी भाषी कपड़ा मिल मजदूरों की दुर्दशा के लिए मौजूदा केंद्र सरकार की आर्थिक नीति को जिम्मेदार ठहराया।
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शरद पवार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महाराष्ट्र में एक समारोह को संबोधित करते हुए शनिवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार सत्तारूढ़ सरकार पर हमलावर हुए। शदर पवार ने दावा किया कि लोगों को जाति और धर्म के आधार पर बांटने की कोशिशें की जा रही हैं। सत्तारूढ़ सरकार को लोगों की समस्याओं को हल करने में कोई दिलचस्पी नहीं है, बल्कि मंदिर की राजनीति कर उनका ध्यान भटकाया जा रहा हैं। मंदिर की राजनीति को लेकर शरद पवार ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। 
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मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर साधा निशाना
महाराष्ट्र में हिन्द मजदूर सभा के स्थापना दिवस की प्लेटिनम जयंती के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए शरद पवार ने अयोध्या दौरे पर आए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर परोक्ष रूप से कटाक्ष करते हुए कहा कि वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए मंदिर की राजनीति की जा रही है। पवार ने कहा, ये कठिन समय है। हमें सतर्क रहना होगा। आप देश के लिए और यहां तक कि अन्य देशों के लिए भी काम करते हैं। मुझे आपके भविष्य पर संदेह नहीं है, यह उज्ज्वल है लेकिन यह आपकी एकता पर निर्भर करता है। उन्होंने मुंबई में मराठी भाषी कपड़ा मिल मजदूरों की दुर्दशा के लिए मौजूदा केंद्र सरकार की आर्थिक नीति को जिम्मेदार ठहराया। पवार ने सरकार पर श्रमिक संघों को कमजोर करने और देश में मजदूरों से अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा, कई जगहों पर सरकारी काम बंद हो रहे हैं। लोगों को जाति और धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश हो रही है। बेरोजगारी, महंगाई जैसे कई मुद्दे हैं और उम्मीदें हैं कि इन समस्याओं को हल करने के लिए सत्ता का इस्तेमाल किया जाना चाहिए लेकिन सत्तारूढ़ सरकार दिलचस्पी नहीं ले रही है।



मुंबई को मानाजा जाता था भारत की औद्योगिक राजधानी
शरद पवार ने कहा, लगभग 25-30 साल पहले मुंबई को भारत की औद्योगिक राजधानी माना जाता था, लेकिन अब स्थिति अलग है। कोई भी इसे अब औद्योगिक राजधानी नहीं मानता क्योंकि वहां मजदूरों नहीं हैं और वहां श्रमिकों की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि मुंबई के गिरनगांव में 110-115 कपड़ा मिलें चलती थीं और चॉल में मजदूर रहते थे लेकिन परिदृश्य बदल गया है। गगनचुंबी इमारतें बन गई हैं और गिरगांव के मराठी इन ऊंची इमारतों का हिस्सा नहीं हैं। मजदूर तबाह हो गए हैं। यह केंद्र सरकार की वर्तमान आर्थिक नीति का परिणाम है। 
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