शरद पवार ने 1978 में जनता पार्टी, जिसमें वर्तमान भारतीय जनता पार्टी यानि जनसंघ भी शामिल थी, के साथ मिलकर महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर किया था। दरअसल, 1977 के आम चुनाव में कांग्रेस (यू) और कांग्रेस (आई) ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। पवार कांग्रेस (यू) में शामिल हुए थे। राज्य में जनता पार्टी की सरकार को सत्ता में आने से रोकने के लिए दोनो कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाई थी।
लेकिन, कुछ महीने बाद पवार ने कांग्रेस (यू) को तोड़ दिया और जनता पार्टी के सहयोग से प्रगतिशील विकास संगठन (पुरोगमी विकास आघाड़ी) बनाई और इसके बाद मुख्यमंत्री बन गए थे। हालांकि पवार 1986 में फिर कांग्रेस में शामिल हुए थे और उसके बाद 26 जून 1988 से लेकर 25 जून 1991 तक दो बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे।
शरद पवार ने साल 1999 में सोनिया गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनाने का मुखर विरोध किया था। उनके साथ ही कांग्रेस नेता पीए संगमा और तारिक अनवर ने भी सोनिया के विदेशी मूल का होने के मुद्दे को तूल दिया था। इसके बाद इन तीनों नेताओं को कांग्रेस से बाहर कर दिया गया।
निकाले जाने के बाद पवार ने 25 मई 1999 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का गठन किया। पीए संगमा और तारिक अनवर भी पार्टी में पवार के सहयोगी बने। इसके बाद महाराष्ट्र में एनसीपी-कांग्रेस का गठबंधन हुआ और दोनो पार्टियों ने मिलकर लगातार 15 साल तक सरकार चलाई।