फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भाजपा-अजित क्या जुटा पाएंगे बहुमत का आंकड़ा, महाराष्ट्र विधानसभा का वर्तमान गणित

Sat, 23 Nov 2019 11:42 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
विज्ञापन
अजित पवार-देवेंद्र फडणवीस - फोटो : ANI
विज्ञापन

महाराष्ट्र की राजनीति में इतना बड़ा उलटफेर हो जाएगा इसका किसी को अंदाजा तक नहीं था। सभी जगह शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) गठबंधन की सरकार बनने की चर्चाएं चल रही थीं। इसी बीच शनिवार सुबह राजभवन में देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर सभी को हैरान कर दिया। इस गठबंधन के बारे में किसी को कानों कान खबर तक नहीं थी। अब दोनों के सामने विधानसभा में बहुमत साबित करने की सबसे बड़ी चुनौती है।

विज्ञापन


राजनीतिक समीकरणों ने उलझाया

भाजपा और एनसीपी ने मिलकर सरकार तो बना ली है लेकिन राजनीतिक समीकरणों को उलझा दिया है। नवनियुक्त सरकार को 30 नवंबर तक बहुमत साबित करना है। वहीं एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार का कहना है कि भाजपा के साथ जाने का फैसला अजित पवार का है न कि पार्टी का। राज्य विधानसभा के लिए 21 अक्तूबर को चुनाव हुए थे जिनका 24 अक्तूबर को फैसला आया था। इसमें एनसीपी के खाते में 54 सीटें गई थीं। अब यह देखना होगी कि एनसीपी के कितने विधायक पार्टी से अलग होकर अजित के साथ जाएंगे।

महाराष्ट्र की मौजूदा विधानसभा स्थिति

महाराष्ट्र में 288 विधानसभा सीटे हैं। जिसमें से भाजपा को 105, शिवसेना को 56, कांग्रेस को 44 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 54 सीटों पर जीत मिली है। इसके अलावा बहुजन विकास अघाड़ी के खाते में तीन सीटें गई हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमिन, प्रहर जनशक्ति पार्टी और समाजवादी पार्टी को दो-दो सीटों पर जीत हासिल हुई। वहीं राज्यभर से 13 निर्दलीय उम्मीदवारों को चुना गया है।

बहुमत के लिए चाहिए 145 का आंकड़ा

महाराष्ट्र में विधानसभा की 288 सीटें हैं। किसी भी पार्टी को सदन में अपना बहुमत साबित करने के लिए 145 का जादुई आंकड़ा चाहिए। चुनाव परिणाम में भाजपा के पास 105 और एनसीपी को 54 सीटें मिली हैं। यदि दोनों पार्टियों के आंकड़े को मिला दिया जाए तो यह 159 होता है जो बहुमत से ज्यादा है। लेकिन एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार का कहना है कि भाजपा के साथ सरकार बनाना गलत है। ऐसे में भाजपा को बहुमत साबित करने में परेशानी हो सकती है।

विज्ञापन

भाजपा के पास ये है संख्याबल

राज्य के ताजा घटनाक्रम पर नजर डाली जाए जो एनसीपी की राह से अलग जाकर भाजपा के साथ सरकार बनाने वाले अजित पवार के पास जरूरी संख्या मौजूद है। शरद पवार का साफ कहना है कि भाजपा के साथ जाना अजित का व्यक्तिगत निर्णय है। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा को एनसीपी के सभी 54 विधायकों का समर्थन नहीं मिलने वाला है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि अजित के पास एनसीपी के आधे से ज्यादा विधायकों का समर्थन है। वहीं भाजपा दावा कर रही है कि उसे 13 निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल है।

अजित को दल-बदल के तहत चाहिए 36 विधायक

एनसीपी के 54 विधायकों को विधानसभा चुनाव में जीत मिली है। दल बदल कानून के प्रावधान के अंतर्गत अलग गुट को मान्यता हासिल करने के लिए दो तिहाई विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। इस तरह अजित पवार की चुनौती 36 विधायकों का समर्थन हासिल करना है। यदि वह 36 या इससे ज्यादा विधायकों का समर्थन हासिल कर लेते हैं तो उन्हें नई पार्टी बनाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। मगर ऐसा न होने की परिस्थिति में बागी विधायकों की विधानसभा सदस्यता खत्म हो सकती है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें