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शाहीन बागः खौफ के साये में बेहद सतर्क हैं प्रदर्शन में शामिल लोग, फरवरी का पहला सप्ताह डरावना

Fri, 24 Jan 2020 12:09 PM IST
Priyesh Mishra शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • पुलिस कर सकती है कर्रवाई
  • केन्द्र के रुख से बढ़ रही है चिंता
  • भाजपा नेताओं के बयान का क्या मतलब?
  • गृहमंत्री और पीएम तो सबके हैं
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शाहीन बाग में प्रदर्शनकारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शाहीन बाग में महिलाओं का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरने लगा है। प्रदशर्न में शामिल और मंच से उनका उत्साह बढ़ाने वाले चाहे जितना इंकलाबी भाषण दें, लेकिन अंदर एक खौफ वालेंटियर्स को परेशान कर रहा है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कुछ वालेंटियर्स का कहना है कि दिल्ली पुलिस के सहारे सरकार कभी भी लोगों की परेशानी का हवाला देकर उठा सकती है। बताते हैं इसका जाल बुना जा रहा है और फरवरी के पहले सप्ताह में इसे अंजाम दिया जा सकता है।

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एक वालेंटियर ने बताया कि दिल्ली पुलिस की भाषा बदल रही है,जबकि प्रदर्शन पूरी तरह से सहयोगात्मक, अहिंसात्मक, शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। प्रदर्शन में महिलाएं, बच्चे हैं। एक अन्य वालेंटियर का कहना है कि हम तो केवल इतनी सी मांग कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री या केन्द्र सरकार का वरिष्ठ जिम्मेदार मंत्री आकर भरोसा दिला दे। कह दे कि भारत में रहने वाले भारतीय हैं। नागरिकता पर कोई खतरा नहीं है। यहीं रहेंगे।

क्यों बढ़ रहा है खौफ, वालेंटियर्स के अनुसार-
1. उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भाषा, महिलाएं और बच्चे चौराहे पर बैठे और पुरुष रजाई में। उ.प्र. में पुलिस की सीएए के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई।
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2. दिल्ली से भाजपा के उम्मीदवार कपिल मिश्रा का  8 फरवरी को सड़को पर भारत पाकिस्तान मैच होने का वक्तव्य, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का इसके समर्थन में आना।
3. दिल्ली के चुनाव में प्रचार अभियान का रंग, हिन्दू और मुसलमान में बंटवारा, नफरत को दी जा रही हवा। वोट ध्रुवीकरण की कोशिश।

हमारे पास तो हमारा कोई नहीं आया, वालेंटियर्स का तर्क सुनिए
1. डीयू की छात्रा का कहना है कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री हमारे भी हैं।वह पूरे देश के हैं। हम परेशान हैं और वह नहीं आए, न किसी जिम्मेदार को भेजा। हम 15 दिसंबर से बैठे हैं, वह कम से कम हमारी पीड़ा तो सुन लेते? साफ है, हमें अपना नहीं मानते।
2. एक प्ले स्कूल की टीचर का कहना है कि हमने अपनी आवाज उठाई है। आवाज उठाना,सरकार से परेशानी बताना नागरिक होने के नाते संविधान ने दिया है। सरकार हमें सुनती क्यों नहीं? क्योंकि सरकार जो चाह रही है, वह यहां आने से बेकार हो जाएगा।
3. गाजियाबाद के एक इंजीनियरिंग कालेज की पास आऊट का कहना है कि सरकार देश को दिशा नहीं दे पा रही है। बेरोजगारी चरम पर है, अर्थव्यवस्था की हालत खराब है,उद्योग,उत्पादन क्षेत्र सरकारी नीति में गड़बड़ हो रहे हैं। आए दिन राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी नकारात्मक रिपोर्ट दे रही है। बैंक हो या शिक्षा का क्षेत्र सब तंग हैं और सरकार को तीन तलाक का कानून,सीएए,एनआरसी, एनपीआर के बहाने लोगों को लड़ाने की पड़ी है।
4. असलम,फराज,जाकिर जैसै वालेंटियर के मुताबिक सरकार का ध्यान फूट डालो,राज करो पर है। इसलिए ऐसे प्रावधान के बहाने वह जिम्मेदारी छिपाने, लोगों का ध्यान भटकाने में लगी है। 
 

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पीएम, एचएम ने कहा सीएए नागरिकता देगा.....कैसे करें भरोसा

वालेंटियर पीएम मोदी और एचएम शाह के स्पष्टीकरण कि सीएए नागरिकता देने का कानून है, लेने का नहीं। किसी की नागरिकता नहीं जानेवाली, वालेंटियर का कहना है कि भरोसा करें? वह हमारे बीच जानबूझकर नहीं आ रहे हैं। सीएए में मुसलमान को बाहर रखा और हिन्दू, सिख, ईसाई, जैन सब शामिल हैं। देशों में पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश ही हैं। जबकि श्रीलंका, म्यांमार, भूटान, नेपाल समेत अन्य को बाहर कर दिया। यहां तमिल समेत तमाम हिन्दू हैं जो पीड़ित हैं। भारत आना चाहते हैं। आस-पड़ोस के देश कर देते। धार्मिक आधार नहीं बनाते।

क्या विदेशी हो....क्यों डर रहे हो?
वालेंटियर के जवाब सुनिए। असम में एनआरसी हुआ। असमिया भी विरोध कर रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के परिजन, वायुसेना, सेना के पूर्व अधिकारी, गैलेंट्री अवार्ड पाए या राज्य सरकार से सम्मानित लोग नागरिक पंजीकरण रजिस्टर से बाहर हैं। परेशान हैं। 

मुसलमानों में शिक्षा का स्तर,सामाजिक विकास अपेक्षाकृत कम है। मजदूर, कामगार, छोटे पेशे के लोग ज्यादा हैं। लोगों के पास अपना,पीढ़ियों का दस्तावेज, हिसाब- किताब नहीं है। बुलंदशहर से आई 50 साल के उम्र की खेतिहर मजदूर लग रही महिला का कहना है कि उसके पास कागद नहीं है। अंगूठाटीप है। कहाँ से लाएगी।

क्या हो रोडमैप?
वालेंटियर्स का कहना है कि जबतक मांग पूरी नहीं होगी,तबतक यहां रहना है। वालेंटियर सावधान हैं। स्कूल बस,एंबुलेंस और अनिवार्य सेवाओं को रास्ता देने में सहयोग कर रहे हैं। इनका आरोप है कि पुलिस ही एंबुलेंस आदि को रास्ता देने की बजाय उन्हें वापसकर दे रही है। वालेंटियर की कोशिश बिना किसी से टकराए, शांतिपूर्ण, अहिंसात्मक, सहयोगात्मक, प्रदर्शन जारी रखने की है। वह इसे अब सत्याग्रह भी बताने लगे हैं।
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