हत्या के एक मामले में राजद नेता मोहम्मद शाहबुद्दीन को जमानत देने वाले पटना हाईकोर्ट केसमक्ष साक्ष्यों को न रख पाने पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। साथ ही पीठ ने राज्य सरकार से सवाल किया कि आखिकार उसने उन 45 फैसले को क्यों नहीं चुनौती दी जिनमें शाहबुद्दीन को जमानत दी गई है।
न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की पीठ ने बिहार सरकार से सवाल किया कि आखिरकार शाहबुद्दीन केरिहा होने केबाद आप यह सब क्यों कह रहे हैं। पीठ ने कहा कि क्या आप उस वक्त सो रहे थे। पीठ ने कहा कि यह अनूठा मामला है लेकिन सवाल यह है कि इसके कहने पर ऐसा हुआ और कौन लोग इसकेपीछे हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि यह अनूठेपठ से हमारा मतलब लापरवाही है। पीठ ने यह भी कहा कि अगर सबकुछ ठीक होता तो यह मामला हमारे पास क्यों आता।
पीठ ने बिहार सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दिनेश द्विवेदी से पूछा कि सरकार ने उन 45 आदेशों को क्यों नहीं चुनौती दी जिनमें शाहबुद्दीन को जमानत दी गई। पीठ ने कहा, ‘आपको यह सब अब क्यों अहसास हो रहा है जब उसकी जमानत हो गई।’ इससे पहले बिहार सरकार की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील दिनेश द्विवेदी ने कहा कि शाहबुद्दीन की जमानत रद्द कर दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा शाहबुद्दीन को जमानत देने का फैसला सही नहीं क्योंकि हाईकोर्ट ने कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों को दरकिनार कर दिया था।
उन्होंने कहा कि बिना विशेष कारणों या मेडिकल इमरजेंसी के जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी। उन्होंने स्वीकार किया कि इस मामले में बिहार सरकार की ओर से गलती हुई है। इस पर पीठ ने कहा,‘हम आपकी परेशानी समझते हैं और हम सिर्फ यह कहना चाहते हैं कि हम सब कुछ समझते हैं।’