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...क्या तब बिहार सरकार सो रही थी: सुप्रीम कोर्ट

Thu, 29 Sep 2016 12:40 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : getty
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हत्या के एक मामले में राजद नेता मोहम्मद शाहबुद्दीन को जमानत देने वाले पटना हाईकोर्ट केसमक्ष साक्ष्यों को न रख पाने पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। साथ ही पीठ ने राज्य सरकार से सवाल किया कि आखिकार उसने उन 45 फैसले को क्यों नहीं चुनौती दी जिनमें शाहबुद्दीन को जमानत दी गई है। 
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न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की पीठ ने बिहार सरकार से सवाल किया कि आखिरकार शाहबुद्दीन केरिहा होने केबाद आप यह सब क्यों कह रहे हैं। पीठ ने कहा कि क्या आप उस वक्त सो रहे थे। पीठ ने कहा कि यह अनूठा मामला है लेकिन सवाल यह है कि इसके कहने पर ऐसा हुआ और कौन लोग इसकेपीछे हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि यह अनूठेपठ से हमारा मतलब लापरवाही है। पीठ ने यह भी कहा कि अगर सबकुछ ठीक होता तो यह मामला हमारे पास क्यों आता।

पीठ ने बिहार सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दिनेश द्विवेदी से पूछा कि सरकार ने उन 45 आदेशों को क्यों नहीं चुनौती दी जिनमें शाहबुद्दीन को जमानत दी गई। पीठ ने कहा, ‘आपको यह सब अब क्यों अहसास हो रहा है जब उसकी जमानत हो गई।’  इससे पहले बिहार सरकार की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील दिनेश द्विवेदी ने कहा कि शाहबुद्दीन की जमानत रद्द कर दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा शाहबुद्दीन को जमानत देने का फैसला सही नहीं क्योंकि हाईकोर्ट ने कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों को दरकिनार कर दिया था।
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उन्होंने कहा कि बिना विशेष कारणों या मेडिकल इमरजेंसी के जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी। उन्होंने स्वीकार किया कि इस मामले में बिहार सरकार की ओर से गलती हुई है। इस पर पीठ ने कहा,‘हम आपकी परेशानी समझते हैं और हम सिर्फ यह कहना चाहते हैं कि हम सब कुछ समझते हैं।’
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'आप राज्य हैं, आप कैसे असहाय हो सकते हैं'

सुप्रीम कोर्ट
जवाब में द्विवेदी ने कहा कि वह बिहार सरकार द्वारा पूर्व में की गई कार्रवाई को सही नहीं ठहरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उस वक्त हम असहाय थे। इस पर पीठ ने कहा कि आप राज्य हैं, आप कैसे असहाय हो सकते हैं। यह तो सरकार केवकील का दायित्व है कि वह हाईकोर्ट को सही बातें बताए। पीठ ने कहा कि उन्हें यह बताना चाहिए था कि पुनर्विचार याचिका सत्र न्यायालय में लंबित है। 

पीठ ने कहा कि केस की पृष्ठभूमि और स्थिति को देखकर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिरकार वह (शाहबद्दीन) किस तरह का आदमी है। चार बार सांसद और दो बार विधायक रहे इस व्यक्ति पर कितने मामले लंबित है। हम यह सोच रहेकि आम आदमी की समझ क्या कहती है। इतने सारे मामले इस व्यक्ति पर हैं और कई जमानत केआदेश हैं।

बावजूद इसकेआपने जमानत केआदेशों को चुनौती नहीं दी। द्विवेदी ने यह भी कहा कि जेल में रहते हुए भी शाहबुद्दीन अपराधों को अंजाम देता रहा। उन्होंने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह जेल में रहे या बाहर। इसी वजह से उसे सीवान से भागलपुर जेल शिफ्ट किया गया। वहीं पीड़ित पक्ष की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा शाहबुद्दीन को जमानत देना न्याय का उपहास है।

शाहबुद्दीन की ओर से पेश वकील ने पीठ केसमक्ष कहा कि उसके मुवक्किल का मीडिया ट्रायल हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वेवजह की कहानियां बना रही है। सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।
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