कश्मीर के अलगाववादी नेता शब्बीर शाह को 2005 में ही गिरफ्तार कर टेरर फंडिंग मामले पर बड़ा खुलासा हो जाता, यदि तत्कालीन यूपीए सरकार ने इसमें अड़ंगा न लगाया होता। उस वक्त सरकार ने यह कहकर दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा को जांच करने से रोक दिया था कि केंद्रीय खुफिया एजेंसी फंडिंग मामले की तह तक जाएगी।
इसके बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया जिस कारण शब्बीर शाह भी अदालत में पेशी का फरमान ठुकराता रहा। अब दस साल बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) शाह को गिरफ्त में लेकर नए सिरे से टेरर फंडिंग मामले की जांच शुरू कर रहा है।
ईडी के वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि 2005 में हवाला डीलर मोहम्मद असलम वानी और शब्बीर शाह के कनेक्शन की जांच कर रही विशेष शाखा को खुली छूट दी गई होती तो दस साल पहले ही बड़ा खुलासा हो जाता।