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बीएमसी की पूर्व मेयर विशाखा राउत को झटका: जाति प्रमाण पत्र मामले में नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट से याचिका खारिज

Wed, 02 Sep 2026 07:12 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, मुंबई

सार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को शिवसेना (UBT) की पार्षद और मुंबई की पूर्व मेयर विशाखा राउत की याचिका खारिज कर दी। राउत ने म्युनिसिपल कमिश्नर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अमान्य जाति प्रमाण पत्र जमा करने के आधार पर उन्हें पद से हटाने और राज्य सरकार को उनकी अयोग्यता की अधिसूचना जारी करने के लिए कहा गया था।
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विशाखा राउत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिवसेना (UBT) की पार्षद और मुंबई की पूर्व मेयर विशाखा राउत को जाति प्रमाण पत्र अमान्य होने के बाद अयोग्य ठहराने की कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि जाति प्रमाण पत्र गलत घोषित होने के बाद अयोग्यता का कानूनी परिणाम सामने आता है। राउत की अपील फिलहाल कोंकण डिविजनल कमिश्नर के पास लंबित है और हाई कोर्ट ने उन्हें वहां जल्द सुनवाई की मांग करने की छूट दी है।

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जाति प्रमाण पत्र अमान्य होने के बाद कार्रवाई
पिछले महीने जिला जाति जांच समिति ने राउत के ओबीसी प्रमाण पत्र को यह कहते हुए अमान्य कर दिया था कि प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारी के पास ऐसा करने का अधिकार नहीं था।
इसके बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) आयुक्त ने राउत को पद से हटाने का आदेश जारी किया। साथ ही, राज्य सरकार को आधिकारिक राजपत्र (गजट) में उनकी छह साल तक चुनाव लड़ने की अयोग्यता की अधिसूचना जारी करने के लिए सूचित किया गया।
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90 दिनों की रोक का दिया था हवाला
राउत ने अपनी याचिका में दावा किया था कि उनकी अपील पर फैसला होने तक उनकी अयोग्यता पर 90 दिनों की अनिवार्य रोक लागू होती है। हालांकि, जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की पीठ ने इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि पहली नजर में यह तर्क आकर्षक लग सकता है, लेकिन गहराई से जांच करने पर यह टिकता नहीं है।

BMC आयुक्त के अधिकार पर भी सवाल खारिज
राउत ने यह तर्क भी दिया था कि BMC आयुक्त के पास उन्हें पद से हटाने और उनकी अयोग्यता की प्रक्रिया शुरू करने से संबंधित आदेश जारी करने का अधिकार नहीं था। हाई कोर्ट ने इस दलील को भी स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि एक बार जाति प्रमाण पत्र को गलत घोषित कर दिया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति के अयोग्य होने का कानूनी परिणाम अपने आप सामने आता है।
अदालत ने कहा कि एक बार जब जाति प्रमाण पत्र को गलत घोषित कर दिया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति के अयोग्य होने का कानूनी परिणाम सामने आता है। इसलिए, हमें आदेशों में कोई गैर-कानूनी बात नहीं दिखी याचिका में कोई दम नहीं है और इसे खारिज किया जाता है। 

धोखाधड़ी साबित न होने की दलील भी नहीं मानी
राउत ने यह भी दावा किया था कि उनका जाति प्रमाण पत्र धोखाधड़ी के आधार पर अमान्य नहीं किया गया है। इसलिए उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। हाई कोर्ट ने इस तर्क को भी मानने से इनकार कर दिया। अदालत के फैसले के बाद राउत को फिलहाल राहत नहीं मिली है।

कोंकण डिविजनल कमिश्नर के पास लंबित है अपील
जाति जांच समिति के आदेश के खिलाफ शिवसेना (UBT) नेता की अपील कोंकण के डिविजनल कमिश्नर के समक्ष लंबित है। हाई कोर्ट ने राउत को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि वह डिविजनल कमिश्नर के सामने अपनी अपील पर जल्द सुनवाई की मांग कर सकती हैं।

जनवरी में जीता था हाई-प्रोफाइल वार्ड
जनवरी में हुए BMC चुनावों में विशाखा राउत ने हाई-प्रोफाइल वार्ड 191 से जीत दर्ज की थी। इस वार्ड में शिवाजी पार्क और दादर पश्चिम का इलाका शामिल है। उन्होंने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की उम्मीदवार प्रिया सर्वंकर गुरव को हराया था। यह सीट अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए आरक्षित थी।

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2005 में जारी हुआ था OBC प्रमाण पत्र
राउत ने वर्ष 2005 में जारी एक जाति प्रमाण पत्र पेश किया था, जिसमें उन्हें OBC कुनबी समुदाय से संबंधित बताया गया था। हालांकि, अगस्त 2026 में जाति प्रमाण पत्र जांच समिति ने इस प्रमाण पत्र को 'गलत' बताते हुए अमान्य कर दिया। इसके बाद ही उनकी सदस्यता और चुनाव लड़ने की पात्रता को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हुआ।

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