सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु के मंत्री वी सेंथिल बालाजी और उनकी पत्नी मेगाला ने एक बार फिर किसी आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की ईडी की शक्ति का विरोध किया। दंपती ने कहा, मनी लॉन्ड्रिंग रोधी जांच एजेंसी के अफसर पुलिस अधिकारी नहीं हैं। बालाजी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें गिरफ्तार करने के केंद्रीय जांच एजेंसी के फैसले की आलोचना की। बालाजी गिरफ्तारी के बाद भी तमिलनाडु सरकार में बिना विभाग के मंत्री बने हुए हैं।
ईडी अफसर पुलिस अधिकारी नहीं
जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस एम सुंदरेश की पीठ के समक्ष बालाजी के वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया, विजय मदनलाल चौधरी (2022 के आदेश) में यह माना गया है कि ईडी के अफसर पुलिस अधिकारी नहीं हैं। इसलिए, यदि अदालत मानती है कि वे पुलिस हिरासत के हकदार हैं तो आपको (शीर्ष अदालत) यह मानना होगा कि ईडी के अफसर पुलिस अधिकारी हैं।
दो अगस्त को होगी अगली सुनवाई
सिब्बल ने कहा, अगर ईडी के अधिकारी जांच एजेंसी के पास उपलब्ध हुए बिना भी पुलिस की शक्तियों का आनंद लेते रहेंगे तो यह एक गंभीर समस्या है। उन्होंने सीमा शुल्क अधिनियम और विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (फेरा) के समान प्रावधानों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, जांच अधिकारियों को इन दोनों कानूनों के तहत किसी आरोपी की पुलिस हिरासत प्राप्त करने की अनुमति नहीं है। यह (राज्य) पुलिस है जिसे आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत सीमा शुल्क विभाग के लिए आरोपी की हिरासत मिलती है, न कि सीमा शुल्क अधिकारियों को। इसी तरह, धन शोधन निवारण अधिनियम (अधिनियम) के तहत, ईडी अधिकारियों के पास हिरासत में पूछताछ की मांग करने की शक्ति नहीं है। इस मामले में अगली सुनवाई दो अगस्त को होगी।