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Congress: मोहसिना किदवई ने 27 साल बाद राज से उठाया पर्दा, कहा- तिवारी कांग्रेस में शामिल होना मेरी बड़ी गलती

Sun, 09 Oct 2022 09:47 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मोहसिना किदवई ने अपनी किताब में यह भी लिखा है कि हालांकि 1998 में जब सोनिया गांधी कांग्रेस की आलाकमान बनी तो उन्होंने उन सभी गुटों की कांग्रेस में वापसी कराई जो कांग्रेस से अलग हो गए थे। इनमें तिवारी कांग्रेस सहित माधवराव सिंधिया और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एस बंगरप्पा के नेतृत्व वाले धड़े भी शामिल थे। 
 
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वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहसिना किदवई। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कांग्रेस को जल्दी ही अपना नया अध्यक्ष मिलने वाला है। इसी बीच वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मोहसिना किदवई ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि 27 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष पी वी नरसिंह राव के खिलाफ विद्रोह करने और पार्टी से अलग होने वाले गुट 'तिवारी कांग्रेस' में शामिल होना उनके जीवन की सबसे बड़ी भूल थी। 

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वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई ने अपनी आत्मकथा ‘माई लाइफ इन इंडियन पॉलिटिक्स’ में यह बातें लिखीं हैं। बता दें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की बेहद खास और करीबी मानी जाती थीं। उन्होंने इस किताब के एक अध्याय ‘कांग्रेस से अलग होने के अनुभव’ में अपने इस कदम को लेकर अफसोस जताया है। उन्होंने कहा है कि उनके जीवन की ये सबसे बड़ी गलती थी कि उन्होंने माखन लाल फोतेदार की बातों को मान लिया और सोनिया गांधी से व्यक्तिगत रूप से बात करने की जहमत तक नहीं उठाई। 

उन्होंने अपनी किताब में इसके बारे में बताते हुए लिखा है कि ये बात तब की है जब साल 1995 में अर्जुन सिंह, नटवर सिंह, एनडी तिवारी ने तत्कालीन पीएम और कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। उस समय कांग्रेस का अधिवेशन तालकटोरा में होने वाला था। उस अधिवेशन से पहले फोतेदार उनस मिलने आए थे। मुलाकात के दौरान बात करते हुए माखनलाल फोतेदार ने उनसे कहा कि सोनिया गांधी नरसिंह राव से नाराज हैं और वे चाहती हैं कि मोहसिना किदवई अर्जुन सिंह और नटवर सिंह के गुट के साथ जाएं। 
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उन्होंने इस घटना को याद करते हुए किताब में लिखा है कि 'आज जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं तो मुझे लगता है कि मुझे उस अलग हुए समूह, जिसे कांग्रेस (तिवारी) कहा गया, का हिस्सा नहीं बनना चाहिए था। जो अहम मुद्दे थे, उनके बारे में कई वरिष्ठ नेताओं के साथ अगर हम पार्टी में ही रहकर लड़ते तो शायद भविष्य की राजनीति कांग्रेस के लिए बेहतर और उज्ज्वल होती।’

मोहसिना किदवई ने अपनी किताब में यह भी लिखा है कि हालांकि 1998 में जब सोनिया गांधी कांग्रेस की आलाकमान बनी तो उन्होंने उन सभी गुटों की कांग्रेस में वापसी कराई जो कांग्रेस से अलग हो गए थे। इनमें तिवारी कांग्रेस सहित माधवराव सिंधिया और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एस बंगरप्पा के नेतृत्व वाले धड़े भी शामिल थे। 

गौरतलब है कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने यह खुलासा तब किया है जब कांग्रेस अपने सबसे बुरे दौर से गुजकर रही है। अध्यक्ष पद के लिए पार्टी में चुनाव होने जा रहे हैं। और जल्द ही पार्टी को नया अध्यक्ष मिलने वाला है। 

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