एक दौर था जब कई विकसित देश हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रमों को खारिज करते हुए मुंह चिढ़ाते थे। लेकिन कभी साइकिल और बैलगाड़ी पर प्रक्षेपण सामान ले जाते दिखने वाले हमारे वैज्ञानिक आज दुनिया की आधुनिक तकनीक से लैस है। इसरो से जुड़े रहे और डीआरडीओ के पूर्व चीफ कंट्रोलर ए शिवाथानु पिल्लई कहते हैं कि इसरो ने अपनी कामयाबी का रास्ता स्वदेशी तकनीक में ही ढूंढा। मसलन, मिसाइल टैक्नोलॉजी कंट्रोल रेजीम (एमटीसीआर) इस स्वदेशी अभियान की देन रही।
पीएसएलवी टर्निंग प्वॉइंट
इसरो के वैज्ञानिकों ने रॉकेट और अच्छे सॉफ्टवेयर लगे मिसाइल गाइडेंस सिस्टम, उच्च ऊर्जा वाले प्रणोदक, अंडरवॉटर प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, सटीक रडार और कूटलिपि की अपनी पद्धतियां ईजाद कीं। पीएसएलवी का विकास टर्निंग प्वॉइंट रहा। इसके जरिए इसरो ने भारी पेलोड के साथ एक के बाद एक कई सैटेलाइट लॉन्च किए। इस कामयाबी को देखकर विकसित देश भी हैरान रह गए।
इसरो अब रक्षा सैटेलाइट, कॉमर्शियल लॉन्च सेवा, ग्रहों के मिशन और देश के अंतरिक्ष यात्रियों पर ध्यान लगा रहा है। अगले दो वर्षों में वह कई अहम मिशन को अंजाम देने वाला है। इनमें चंद्रयान-3 से लेकर 2022 का मानव मिशन गगनयान शामिल है। साथ ही 2030 तक चांद पर अंतरिक्ष यात्री उतारने की योजना है। एक अन्य अहम कार्यक्रम जियोसिंक्रोनस कक्षा में ऊर्जा उत्पन्न करने वाले सौर ऊर्जा चालित उपग्रह हो सकते हैं।
स्वदेशी तकनीक का दम अंतरिक्ष में इसरो ने गाड़ा झंडा
- वर्ष 1975 : इसरो ने स्थापना के 06 साल बाद पहला अंतरिक्ष सैटेलाइट आर्यभट्ट डिजाइन किया था।
- वर्ष 1984 : भारत की ओर से पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा सोवियत रूस के मिशन पर भेजे गए।
- वर्ष 2013, 05 नवंबर: इसरो ने मंगल की कक्षा में अपना पहला यान भेजा। मंगल की कक्षा में मिशन भेजने वाला पहला एशियाई देश बना भारत। खास बात यह कि भारत इस मिशन को पहले प्रयास में ही सफलतापूर्वक अंजाम देने वाला पहला देश बना।
- वर्ष 2018, 12 अप्रैल: अमेरिका के जीपीएस को टक्कर देने के लिए लॉन्च हुआ नाविक। यह जल्द ही भारत में बड़े पैमाने पर नागरिकों और सेना के लिए इस्तेमाल होने लगेगा।
- वर्ष 2019, 27 मार्च: एंटी सैटेलाइट मिसाइल का सफल परीक्षण कर अपनी ताकत में इजाफा किया। इस लॉन्च से भारत अमेरिका, रूस और चीन के बराबर खड़ा हो गया है।
- वर्ष 2019, 22 जुलाई: चंद्रयान 2 मिशन को अंजाम दिया गया। हालांकि इसे हार्ड लैंडिग का सामना करना पड़ा था।
(इसरो अब तक 109 बार यान अंतरिक्ष में भेज चुका है, यही नहीं दिसंबर 2019 तक 33 देशों के 3015 से ज्यादा सैटेलाइट भेज चुका था।)
अंतरिक्ष में जल्द ही होंगे हमारे गगनयात्री
भारत के पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान गगनयान मिशन की शुरुआत हो चुकी है। 'गगनयात्रियों' का प्रशिक्षण रूस के गागरिन सेंटर में चल रहा है, जहां चार भारतीयों ने असामान्य स्थिति में लैडिंग करने के लिए एक विशेष मॉड्यूल पर प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। इन यात्रियों ने विशेष मॉड्यूल लैंडिंग के लिए फरवरी में जंगली और दलदली क्षेत्रों के प्रशिक्षण को पूरा किया था। वहीं, पानी की सतह पर रहने के अभ्यास को जून में पूरा कर लिया। गगनयान अभियान 2022 में भेजा जाएगा।