दरअसल, पिछले वर्ष कोरोना लहर सामने आते ही यह समझ आ गया था कि अगर महामारी की स्थिति गंभीर होती है तो देश में ऑक्सीजन की भारी कमी हो सकती है। इसे देखते हुए पीएम केयर्स फंड से देश भर में 142 ऑक्सीजन प्लांट लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। यह पूरा ठेका केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के माध्यम से एक ही ठेकेदार को दिया गया था।
दिल्ली में यहां लगने थे प्लांट
दिल्ली के आंबेडकर अस्पताल, दीपचंद बन्धु अस्पताल, बुराड़ी अस्पताल, दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल, बीएसए अस्पताल, जीटीबी अस्पताल और लोकनायक अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाए जाने थे। दिल्ली में खतरनाक औद्योगिक रासायनिक प्लांट्स लगाने की मनाही है। लिहाजा राजधानी में केवल छोटे स्तर के पीएसए प्लांट्स ही लगाए जाने थे। लेकिन ये प्लांट्स भी नहीं लगाए जा सके।
बीते आठ महीनों के दौरान यह ठेकेदार दिल्ली में केवल एक ही प्लांट लगा सका है। अगर बाकी के सात प्लांट भी काम करना शुरू कर देते तो आज दिल्ली को ऑक्सीजन की कमी का यह भारी संकट न झेलना पड़ता। यह सच्चाई सामने आने के बाद अब आम आदमी पार्टी भाजपा पर हमलावर है, जो ऑक्सीजन की कमी के मुद्दे पर रक्षात्मक मुद्रा में आ गई थी।