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कोरोना : ऑक्सीजन के मुद्दे पर केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच खींचतान, नहीं लग पाए आठ ऑक्सीजन प्लांट

Sun, 25 Apr 2021 09:42 PM IST
सुरेंद्र जोशी डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • एक पत्र से खुल गई पोल, आठ माह में एक ही प्लांट लगा
  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को लगाने थे सभी प्लांट
  • भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा-  अपनी नाकामी छिपा रही दिल्ली सरकार
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जीएमसी में लगा आक्सीजन जनरेशन प्लांट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली में कोरोना की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। पिछले कई दिनों से यहां कोरोना के कारण रोजाना लगभग 350 लोगों की जान जा रही है। इसमें ऑक्सीजन की कमी बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। अस्पतालों में एक-एक या दो-दो घंटे की ऑक्सीजन बची और इसके कारण लोगों की जान जाने लगी। ऑक्सीजन की कमी के कारण लोगों की मौत होते ही यह मुद्दा गंभीर हो गया। इस मुद्दे पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को घेरा है। वहीं केजरीवाल सरकार ने इसके लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

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भाजपा ने कहा- अपनी नाकामी छिपा रही दिल्ली सरकार
भाजपा ने यह आरोप लगाया किया कि केंद्र सरकार की तरफ से दिल्ली को आठ ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए धन उपलब्ध कराया गया था। लेकिन बीते आठ महीने के बाद भी दिल्ली सरकार केवल एक ही ऑक्सीजन प्लांट लगवा सकी और इसी कारण से आज दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी हो गई है।

दिल्ली प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी नवीन जिंदल ने कहा कि देश की सभी राज्य सरकारें पीएम केयर्स फंड से मिले पैसे से अपने यहां ऑक्सीजन के प्लांट लगा रही हैं। लेकिन दिल्ली सरकार ने इसी दौरान राजधानी में कोई ऑक्सीजन प्लांट नहीं लगाया।
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यही कारण है कि आज दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी हुई और इसके कारण अनेकों मरीजों को अपनी जान गंवानी पड़ी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई मौतों के जिम्मेदार अरविंद केजरीवाल हैं, और इसके लिए दिल्ली सरकार पर हत्या का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

यह है मामला
इसी मामले में एक पत्र सामने आने से आरोप-प्रत्यारोप की दौर शुरू हुआ है। दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले पर हुई सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि दिल्ली में आठ ऑक्सीजन प्लांट लगवाने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार को नहीं, बल्कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को दी गई थी। 

दिल्ली सरकार को इसमें केवल भूमि ही उपलब्ध करानी थी। इसमें भी जिन आठ अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाया जाना था, उसमें से तीन केंद्र सरकार के ही हैं। यानी इन अस्पतालों में जमीन भी इन्हीं अस्पतालों या केंद्र सरकार को ही उपलब्ध करानी थी।

देशभर में 142 प्लांट की दी थी मंजूरी, एक ठेकेदार को दिया ठेका 

दरअसल, पिछले वर्ष कोरोना लहर सामने आते ही यह समझ आ गया था कि अगर महामारी की स्थिति गंभीर होती है तो देश में ऑक्सीजन की भारी कमी हो सकती है। इसे देखते हुए पीएम केयर्स फंड से देश भर में 142 ऑक्सीजन प्लांट लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। यह पूरा ठेका केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के माध्यम से एक ही ठेकेदार को दिया गया था।

दिल्ली में यहां लगने थे प्लांट
दिल्ली के आंबेडकर अस्पताल, दीपचंद बन्धु अस्पताल, बुराड़ी अस्पताल, दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल, बीएसए अस्पताल, जीटीबी अस्पताल और लोकनायक अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाए जाने थे। दिल्ली में खतरनाक औद्योगिक रासायनिक प्लांट्स लगाने की मनाही है। लिहाजा राजधानी में केवल छोटे स्तर के पीएसए प्लांट्स ही लगाए जाने थे। लेकिन ये प्लांट्स भी नहीं लगाए जा सके।
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एक ही प्लांट लगा सका ठेकेदार

बीते आठ महीनों के दौरान यह ठेकेदार दिल्ली में केवल एक ही प्लांट लगा सका है। अगर बाकी के सात प्लांट भी काम करना शुरू कर देते तो आज दिल्ली को ऑक्सीजन की कमी का यह भारी संकट न झेलना पड़ता। यह सच्चाई सामने आने के बाद अब आम आदमी पार्टी भाजपा पर हमलावर है, जो ऑक्सीजन की कमी के मुद्दे पर रक्षात्मक मुद्रा में आ गई थी।
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