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सीमा सुरक्षा बल के इन जवानों ने सीमा पार के आतंकियों को ऐसे किया ढेर, 22 मई को होंगे सम्मानित

Thu, 16 May 2019 07:15 PM IST
अमर शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जम्मू के 'फतवाल' सीमा चौकी में आतंकियों से लोहा लेने वाले एसएसबी के वीर सैनिक - फोटो : BSF
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अदम्य साहस और पराक्रम का पर्याय बन चुके देश की प्रथम रक्षापंक्ति में तैनात सीमा सुरक्षा बल के प्रहरी बलिदान और शौर्य के नित नए कीर्तिमान स्थापित कर पूरे समर्पण भाव से राष्ट्र रक्षा में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर रहे हैं। इनका जोश और जुनून देश की असहनीय प्राकृतिक वेदनाओं पर विजय प्राप्त कर वीरता की ढेरों गाथाएं लिख रहा है। बहादुरी और वीरता से भरी एक ऐसी ही इबारत सीमा सुरक्षा बल के जम्मू सीमांत के अंतर्गत आने वाली सीमा चौकी 'फतवाल' में लिखी गई। जिसमें शामिल अधिकारी और जवानों को गृह मंत्रालय द्वारा सम्मानित किए जाने का ऐलान 26 जनवरी परेड में किया गया है।
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दरअसल 28 नवंबर 2016 की रात 62 बटालियन की सीमा चौकी 'फतवाल' में हैंड हेल्ड थर्मल इमेजर (रात के समय देखने वाला एक यंत्र) की ड्यूटी पर तैनात जवान ने रात में करीब 2330 बजे अंतर्राष्ट्रीय सीमा के नजदीक कुछ लोगों को भारतीय सीमा में घुसपैठ की कोशिश करते देखा। जवान ने तुरंत हरकत में आते हुए इसकी सूचना कंपनी कमांडर युद्धवीर यादव को दी। उन्होंने तुरंत मामले की पुष्टि कर इलाके की घेराबंदी कर आवश्यक कार्रवाई करते हुए हेड क्वार्टर को घटना की जानकारी दी। वहीं कमांडर ने अपनी सूझबूझ का इस्तेमाल करते हुए नजदीकी सीमा चौकी 'चमलियाल' के कमांडर को भी इसकी जानकारी देते हुए जवानों को सतर्क रहने के लिए कहा। 

इधर सूचना पाकर सेक्टर मुखयालय, जम्मू में तैनात उप-महानिरीक्षक बलजीत सिंह कसाना एंटी माइन व्हीकल 'कैस्पर' की सहायता से हथियारों से लैस हो अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। सीमा पर अचानक हलचल बढ़ते देख आतंकियों को भी बीएसएफ द्वारा उनकी हरकत को देख लिए जाने का संदेह होने लगा। जिस पर ऑटोमैटिक हथियारों से लैस आतंकियों ने तैनात अधिकारी और जवानों पर जबरदस्त फायरिंग शुरू कर दी। जिस पर अपनी जान की परवाह किए बगैर जवाबी कार्रवाई करते हुए कसाना और उनकी टीम भी मोर्चा संभालते हुए आतंकियों पर टूट पड़ी। 
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आमने-सामने की इस लड़ाई में दोनों ओर से ग्रेनेड और ऑटोमैटिक हथियारों से भयंकर फायरिंग होने लगी। चारों ओर से हो रही इस भयंकर फायरिंग में आतंकियों ने खुद को बुरी तरह घिरा देख युक्तपूर्वक ढंग से एक पूर्ण सैनिक की तरह विभिन्न सामरिक पोजीशंस का इस्तेमाल कर सुरक्षा बल को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की कोशिश में जुट गए। 

इस दौरान कसाना और उनकी टीम ने तीन आतंकियों को वहीं ढेर कर दिया। वहीं बल की सामान्य शाखा (इंटेलीजेंस) ने भी आतंकियों के लशकर-ए-तैयबा से जुड़े होने की पुष्टि कर दी। 
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फायरिंग खत्म हो जाने के बाद की जाने वाली आवश्यक तलाशी की कार्रवाई के लिए ज्यों ही सीमा प्रहरी घटनास्थल की ओर बढ़े तभी अचानक पाकिस्तान की ओर से सीमा सुरक्षा बल के जवानों पर भयंकर बमबारी और गोलीबारी शुरू हो गई। जिस पर ऑपरेशन में शामिल उप-महानिरीक्षक, बलजीत सिंह कसाना, सहायक उप-निरीक्षक, ओमप्रकाश, आरक्षक मुकेश कुमार, आरक्षक परसराम व आरक्षक विभास बतब्याल को गंभीर चोटें आईं। 

घायल होने के बावजूद अपने अदम्य साहस और हार न मानने के जज्बे के दम पर कसाना और उनकी टीम ने दुश्मन के पोस्ट पर प्रभावी गोलीबारी जारी रखी। पाकिस्तान पोस्ट पर चारों ओर से हो रही फायरिंग को देखते हुए दुश्मन के मानों पांव उखड़ने लगे। गंभीर रूप से घायल जवानों को एंटी माइन व्हिकल की सहायता से तुरंत नजदीकी सतवारी अस्पताल पहुंचाया गया। 

सर्च ऑपरेशन के दौरान बल को तीन आतंकियो के शव सहित तीन एके राईफल, 20 मैगजीन, 517 एके सीरीज की गोलियां, नौ खाली केस, एक पिस्टल सहित एक मैगजीन 16 राउंड, 31 ग्रेनेड, 10 आईईडी, दो चाकू, दो भारतीय सेना की यूनिफार्म, दो वायलेस सेट, एक वायर कटर, एक जीपीएस, एक मोनोक्यूलर आदि सामान बरामद हुआ। 

इस ऑपरेशन के दौरान उप-महानिरीक्षक बलजीत सिंह कसाना, सहायक कमांडेंट युद्धवीर यादव, सहायक उप-निरीक्षक सुरजीत सिंह, सहायक उप-निरीक्षक ओम प्रकाश, आरक्षक मुकेश कुमार, आरक्षक परसराम, आरक्षक विभास बतब्याल ने असाधारण वीरता का परिचय दिया। 

आने वाली 22 मई को सीमा सुरक्षा बल इन वीर सपूतों को उनके शौर्य और पराक्रम के लिए अलंकृत करने जा रहा है।
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