152 साल पूरे कर चुके देशद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाते हुए इसके बारे में गहरी दिलचस्पी पैदा की है। विधि आयोग ने 2018 में इस पर परामर्श पत्र जारी किया और कानूनविदों, सरकार, अकादमिक जगत, विद्यार्थियों और आम नागरिकों में गहन चर्चा की जरूरत भी बताई। ब्रिटेन में सत्ता विरोधियों को सागर पार भेजने से लेकर भारत में ब्रिटिश राज द्वारा आजादी के आंदोलन कुचलने तक में इसका उपयोग हुआ।
कानून में क्या
आईपीसी 124ए के अनुसार, कोई व्यक्ति अगर कानून द्वारा स्थापित सरकार के खिलाफ शब्दों को बोलकर, लिखकर, इशारे से, दिखने योग्य संकेत या किसी अन्य तरह से असंतोष भड़काता है या ऐसी कोशिश करता है या सरकार के खिलाफ लोगों में घृणा, अवज्ञा या उत्तेजना पैदा करता या ऐसा करने की कोशिश करता है, तो इसे देशद्रोह मान कर हुए उसे तीन वर्ष कारावास से लेकर उम्रकैद तक और जुर्माने की सजा दी जा सकती है।
जन व्यवस्था बिगाड़ने वाले वक्तव्य देशद्रोह माने
आंकड़ों में देशद्रोह
6 साल में 356 केस, 548 आरोपी 2020 तक जारी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड की रिपोर्ट के अनुसार 2015 से 2020 तक धारा 124ए में 356 केस दर्ज हुए। इनमें 548 आरोपी गिरफ्तार हुए।
| वर्ष | केस | गिरफ्तार | सजा |
| 2020 | 73 | 44 | 33.3% |
| 2019 | 93 | 99 | 3.3% |
| 2018 | 70 | 56 | 15.4% |
| 2017 | 51 | 228 | 16.7% |
| 20216 | 35 | 48 | 33.3% |
| 2015 | 30 | 73 | 0 |
| वर्ष | केस | गिरफ्तार | सजा |
| 2020 | 73 | 44 | 33.3% |
| 2019 | 93 | 99 | 3.3% |
| 2018 | 70 | 56 | 15.4% |
| 2017 | 51 | 228 | 16.7% |
| 20216 | 35 | 48 | 33.3% |
| 2015 | 30 | 73 | 0 |