विधानसभा चुनावों के दूसरे चरण में सोमवार को छिटपुट हिंसा के बीच असम की 61 और पश्चिम बंगाल की 31 सीटों पर मतदान हुआ। दूसरे चरण में भी पहले चरण की तरह ही भारी मतदान हुआ। दोनों राज्यों में 75 फीसदी से भी ज्यादा वोट पड़े। असम में शाम पांच बजे तक 78.09 फीसदी मतदान हुआ था। इसके बाद भी वोटिंग जारी थी।
वोटिंग के दौरान असम के बरपेटा जिले के सरभोग विधानसभा क्षेत्र में केंद्रीय बलों के जवानों व वोटरों के बीच हिंसक झड़प हुई। इसमें अब्दुल रशीद (80) नामक एक वोटर की मौत हो गई, जबकि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के दो लोगों समेत तीन घायल हो गए। इसके अलावा छयगांव इलाके में भी वोटरों के साथ झड़प के बाद सुरक्षा बलों को हवाई फायरिंग करनी पड़ी।
असम की 61 सीटों में से सत्तारूढ़ कांग्रेस ने 57 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। भाजपा ने इनमें से 35 सीटों पर चुनाव लड़ा जबकि उसकी सहयोगी बोडो पीपुल्स पार्टी (बीपीएफ) ने 10 और असम गण परिषद (अगप) ने 19 पर। राज्य में दूसरे दौर के मतदान के लिए खास कर बोडो-बहुल इलाकों में सुरक्षा का भारी इंतजाम किया गया था। इसके अलावा बांग्लादेश से लगी सीमा भी सील कर दी गई थी। राज्य में दूसरे दौर की जिन 61 सीटों पर सोमवार को मतदान हुआ, उनमें से कम से कम 41 पर अल्पसंख्यक ही निर्णायक हैं। यही वजह है कि तमाम नेताओं ने इस दौर में अल्पसंख्यकों को लुभाने की जमकर कवायद की।
दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल में भी कई मतदान केंद्रों पर तृणमूल कांग्रेस समर्थकों की ओर से विरोधी दलों के एजेंटों के साथ मारपीट के आरोप लगने के मामले सामने आए। बर्दवान जिले के जामुड़िया में एक मतदान केंद्र के बाहर बमों से भरे दो थैले भी बरामद किए गए। बांकुड़ा जिले के सोनामुखी में कांग्रेस उम्मीदवार के साथ भी धक्का-मुक्की की खबर है। विपक्ष के नेता सूर्यकांत मिश्र ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के लोगों ने कई मतदान केंद्रों पर कब्जा कर लिया और वोटरों को भी धमकी दी।
राज्यसभा में असम का प्रतिनिधित्व करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी दिल्ली से यहां वोट डालने आए। उनके अलावा असम से बॉक्सर शिव थापा अपने परिवार के सदस्यों के साथ वोट डालने पहुंचे। उन्होंने कहा कि वह ट्रेनिंग के लिए राज्य से बाहर थे, लेकिन वह खास वोट देने के लिए यहां पहुंचे हैं।