पलायन की सूची नंबर दो में भी भाजपा सांसद गलती कर गए। कांधला की सूची में कई नाम ऐसे सामने आए हैं, जो रोजगार या अन्य वजहों से कांधला से दूसरे शहरों में जाकर शिफ्ट हो गए। वहीं, मजदूरों के नाम भी सूची शामिल हैं।
भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने कांधला से पलायन करने वाले 63 लोगों की सूची जारी की, जबकि दूसरी सूची में 58 नाम बताए। दूसरी सूची को सांसद ने तस्दीक कराने के बाद जारी करने की बात कही। कांधला में जाकर पता चला कि दूसरी सूची में अधिकांश नाम ऐसे हैं, जो 10 साल पूर्व कांधला छोड़कर चले गए हैं। वहीं, पहली सूची में पांच मजदूरों के नाम शामिल हैं। इसके अलावा सूरज प्रकाश के बारे में बताया गया कि वह निजी कारणों से पानीपत जाकर बस गए, उनकी पत्नी शिक्षिका थी और सेवानिवृत्त हो चुकी हैं।
वहीं, मास्टर रमेश चंद सेवानिवृत्त होकर शहर छोड़ गए। उनके साथ कोई आपराधिक घटना की जानकारी नहीं मिल सकी। डीएम सुजीत कुमार का कहना है कि अभी कांधला की सूची उन्हें प्राप्त नहीं हुई है। सूची मिलने के बाद उसका भी सत्यापन कराया जाएगा।
कैराना की सूची पर भी यही सवाल उठे थे
सांसद ने कैराना से 346 परिवारों के पलायन की सूची जारी की थी, तो उसमें भी यह सवाल उठा था कि करीब सौ से ज्यादा मजदूरों के नाम शामिल कर लिए गए। हरियाणा पास होने और बेहतर मजदूरी मिलने के कारण कैराना से जाने की बात कही जा रही है।
भाजपा कमेटी के साथ मजिस्ट्रेट की ड्यूटी
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या के निर्देश पर गठित कमेटी के सदस्य बुधवार को कैराना पहुंचेंगे और पलायन प्रकरण की जानकारी लेंगे। इस दौरान पुलिस प्रशासन ने कैराना में सुरक्षा के लिहाज से खास इंतजाम किए हैं। शासन के निर्देश पर एक कंपनी पीएसी अतिरिक्त तैनात रखी जाएगी। वहीं, एक मजिस्ट्रेट भी कमेटी के साथ मौजूद रहेंगे।
राष्ट्रपति शासन लगाने की करेंगे मांग
पलायन प्रकरण उठाने के बाद सांसद हुकुम सिंह से जब पूछा गया कि केंद्र में आपकी सरकार है, तो उत्तराखंड की तरह यूपी में राष्ट्रपति शासन लागू करने में हिचक क्यों हो रही है। इस पर सांसद का कहना था कि यूपी में राष्ट्रपति शासन लागू कराने की मांग की जाएगी।