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G20: अफ्रीका में लिखी गई जिनपिंग के दिल्ली न आने की स्क्रिप्ट; पुतिन के बाद नहीं आने वाले दूसरे नेता होंगे शी

सार

जोहान्सबर्ग में आयोजित 15वें 'ब्रिक्स' शिखर सम्मेलन में जब मोदी और जिनपिंग के बीच संक्षिप्त मुलाकात हुई तो उसे लेकर सरकारी बयान जारी हुआ था। पहले चीन की तरफ से कहा गया कि इस मुलाकात के लिए पीएम मोदी की ओर से आग्रह किया गया। इसके कुछ देर बाद भारत ने बयान जारी कर दिया कि इसके लिए चीन की ओर से आग्रह किया गया था। दोनों देशों के अलग-अलग बयान से असमंजस बन गया। 
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भारत-चीन सीमा विवाद। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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चीन के राष्ट्रपति 'शी जिनपिंग' के भारत में 9-10 सितंबर को होने वाले 'जी20' शिखर सम्मेलन में शामिल होने की संभावना कम हो गई हैं। एक न्यूज रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग की जगह जी-20 की बैठक में इस बार चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग आ सकते हैं। हालांकि, अभी तक दोनों ही देशों के विदेश मंत्रालयों की तरफ से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। 

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जानकारों का कहना है कि जिनपिंग के दिल्ली न आने की स्क्रिप्ट, 23 अगस्त को दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित 15वें 'ब्रिक्स' शिखर सम्मेलन में लिखी गई थी। वहां पर पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात को लेकर दोनों मुल्कों के विदेश मंत्रालयों द्वारा जारी बयान कुछ अलग कहानी कह रहा था। उस मुलाकात के बाद चीन द्वारा 'अरुणाचल प्रदेश' और 'अक्साई चिन' को चीनी सीमा में दिखाने वाला एक नक्शा जारी कर दिया गया। इससे पहले रूस के राष्ट्रपति पुतिन भी दिल्ली में आयोजित होने वाले 'जी20' शिखर सम्मेलन में आने से इनकार कर चुके हैं। 
 
बॉर्डर विवाद पर 19 दौर की वार्ता, नतीजा कुछ नहीं
बता दें कि 15वें ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 24 अगस्त को एक अनौपचारिक एवं संक्षिप्त वार्ता होने की बात कही गई। ऐसा केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया था। दोनों देशों के बीच 'लद्दाख' बॉर्डर पर जारी तनाव कम करने के लिए पीएम मोदी और जिनपिंग ने बातचीत की। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (एलएसी) पर 2020 से तनाव चल रहा है। दोनों मुल्कों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीमा विवाद का हल निकालने के लिए 19 दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अभी तक मामले का समाधान नहीं हो सका। यह माना जा रहा था कि चीन के राष्ट्रपति जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए जब दिल्ली पहुंचेंगे तो दौरान पीएम मोदी के साथ उनकी अनौपचारिक बातचीत हो सकती है। 
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क्या 'ब्रिक्स' सम्मेलन में सब ठीक नहीं रहा?
जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन में सभी सदस्य राष्ट्रों के नेताओं के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया था। प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को संक्षिप्त बातचीत करते हुए देखा गया। हालांकि पीएम मोदी ने जब ब्रिक्स बिजनेस फोरम की बैठक को संबोधित किया तो उस वक्त 'शी जिनपिंग' मौजूद नहीं थे। उन्होंने चीन के वाणिज्य मंत्री वांग वेनटाओ को उस बैठक में भेजा था। 

जानकारों का कहना है कि इससे पहले दोनों नेताओं के बीच जब कभी इस तरह की संक्षिप्त बातचीत हुई है, उसमें पीएम मोदी ने सीमा विवाद का शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालने पर जोर दिया है। ब्रिक्स सम्मेलन से पहले दोनों नेताओं ने गत वर्ष उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित हुई शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) की बैठक में मंच साझा किया था। हालांकि उस वक्त भी दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत नहीं हुई थी। 

मुलाकात पर दोनों देशों का अलग बयान
जोहान्सबर्ग में आयोजित 15वें 'ब्रिक्स' शिखर सम्मेलन में जब मोदी और जिनपिंग के बीच संक्षिप्त मुलाकात हुई तो उसे लेकर सरकारी बयान जारी हुआ था। पहले चीन की तरफ से कहा गया कि इस मुलाकात के लिए पीएम मोदी की ओर से आग्रह किया गया। इसके कुछ देर बाद भारत ने बयान जारी कर दिया कि इसके लिए चीन की ओर से आग्रह किया गया था। दोनों देशों के अलग-अलग बयान से असमंजस बन गया। 

आम लोगों में इन बयानों का मतलब यह निकाला गया कि दोनों देशों के बीच संबंध अभी ठीक नहीं हैं। चीन की ओर से जो बयान जारी हुआ, उसमें सीमा विवाद का जिक्र ही नहीं किया गया। डिसइंगेजमेंट पर कोई बात नहीं हुई। दूसरी तरफ भारत के बयान में सीमा विवाद को लेकर कहा गया है कि इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। पीएम मोदी ने जब ब्रिक्स बिजनेस फोरम की बैठक को संबोधित किया तो 'शी जिनपिंग' वहां से चले गए। उन्होंने अपने प्रतिनिधि को वहां भेज दिया। इसके बाद चीन ने 28 अगस्त को एक नया नक्शा जारी कर दिया। चीन ने इसे अपना 'स्टैंडर्ड मैप' बताया था। इसमें अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को चीनी सीमा में दिखाया गया है। 

नक्शे पर दोनों देशों के बीच बयान आने लगे
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन के नक्शे को लेकर कहा, ऐसे बेतुके दावे करने से दूसरे का क्षेत्र आपका नहीं हो जाता है। इसके बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने भारत के विरोध का जवाब दिया। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा, 28 अगस्त को प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय ने 2023 का स्टैंडर्ड मैप जारी किया है। चीन में कानून के मुताबिक संप्रभुता की प्रक्रिया के तहत ये एक नियमित प्रथा है। हम उम्मीद करते हैं कि संबंधित पक्ष इस मुद्दे पर वस्तुनिष्ठ रहेगा और वह शांति से काम लेगा। संबंधित पक्ष इस मुद्दे की आवश्यकता से ज्यादा व्याख्या करने से बचे। 

इससे पहले अप्रैल 2023 में चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश के 11 स्थानों के नाम बदलने को मंजूरी दे दी थी। उस वक्त भी भारत ने चीन के उस कदम पर अपना विरोध जताया था। चीन, अरुणाचल प्रदेश में 90 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन पर अपना दावा करता है। इतना ही नहीं, चीन ने पश्चिम में अक्साई चिन के 38 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है।

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