अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से कई अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन सक्रिय हैं। इन संगठनों से पैदा होने वाले खतरों का मुकाबला करने लिए शंघाई सहयोग संगठन के क्षेत्रीय आतंक रोधी ढांचे (एससीओ-आरटीएस) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी एससीओ सदस्य देशों ने इन खतरों से निपटने के उपायों पर चर्चा की गई।
आरएसटीएस परिषद की यह बैठक दिल्ली में आयोजित की गई थी। बैठक में चीन और पाकिस्तान के समेत सभी सदस्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
भारत के उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार प्रमुख दत्तात्रेय पदसल्गीकर ने बताया कि बैठक में अगले साल 2023 में सैन्य अभ्यास करने का फैसला लिया गया है, जिसे 'सॉलिडैरिटी-2023' कहा जाएगा। बताया जा रहा है कि यह अभ्यास चीन में आयोजित किया जाएगा।
पदसल्गीकर ने बताया कि अफगानिस्तान से अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों द्वारा पेश की गई चुनौतियों और खबरों का सामना करने के लिए सदस्य देशों के अधिकारियों द्वारा मंजूरी दी गई। भारत ने एससीओ-आरटीएस अध्यक्ष के रूप में बैठक की मेजबानी की।
उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने आगे कहा, एससीओ-आरएटीएस परिषद में एससीओ सदस्य देशों ने एक संयुक्त सीमा अभियान 'सॉलिडैरिटी-2023' आयोजित करने का फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि बैठक में एससीओ-आरएटीएस के पहले के फैसलों को लागू करने की प्रक्रिया पर भी विचार किया गया।
पाकिस्तान से संबंधों की बहाली आतंकवाद मुक्त माहौल में ही संभव : विदेश मंत्रालय
भारत ने आज फिर दोहराया कि पाकिस्तान के साथ सामान्य संबंधों की बहाली आतंकवाद के मुक्त माहौल में ही हो सकती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने नियमित प्रेसवार्ता में एक सवाल के जवाब में यह बात कही। कजाखस्तान की राजधानी अस्ताना में आयोजित एशिया में विश्वास वृद्धि एवं संवाद के लिए सम्मेलन (सीका) की एक बैठक में पाकिस्तान द्वारा जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाये जाने पर विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी के जवाब के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए बागची ने कहा कि उन्होंने जो वक्तव्य दिया उसे आपने देखा है।
मैं इससे अधिक कुछ कहने की स्थिति में नहीं हूं क्योंकि हमने पाकिस्तान की धरती से पनपने वाले आतंकवाद को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। बागची ने कहा कि हमने हमेशा कहा है कि हम पाकिस्तान के साथ सामान्य संबंध चाहते हैं, लेकिन यह आतंकवाद से मुक्त एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में हो सकता है।
कनाडा में पाकिस्तान समर्थित खालिस्तानी जनमत संग्रह को लेकर एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत विरोधी तत्वों द्वारा कराये जा रहे कथित जनमत संग्रह पर हमारा रुख एकदम स्पष्ट है और इसे कनाडा की सरकार को अवगत करा दिया गया है। हमने सार्वजनिक रूप से पहले भी यह जानकारी साझा की थी। बागची ने कहा कि हमने दिल्ली में कनाडा उच्चायोग और ओटावा में हमारे उच्चायोग के द्वारा कनाडा सरकार के समक्ष ये मुद्दा उठाया है। हम दोनों स्थानों पर यह मुद्दा उठाते रहेंगे।