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Supreme Court: शीर्ष कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, विधायक बने रहेंगे कांग्रेस के नंजेगौड़ा

Tue, 14 Oct 2025 10:36 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस विधायक के वाई नंजेगौड़ा की जीत रद्द करने वाले कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी और उन्हें विधायक बने रहने की अनुमति दी। कोर्ट ने चुनाव आयोग को मालुर विधानसभा क्षेत्र की दोबारा मतगणना करने और नतीजा सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपने का निर्देश दिया।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें कांग्रेस विधायक के वाई नंजेगौड़ा की जीत को रद्द किया गया था। शीर्ष कोर्ट ने चुनाव आयोग को 2023 के मालुर विधानसभा क्षेत्र में मतगणना की दोबारा जांच कर रिपोर्ट बंद लिफाफे में कोर्ट में सौंपने का आदेश दिया है।
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जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने नंजेगौड़ा को विधायक बने रहने की अनुमति दी।लेकिन हाईकोर्ट के 16 सितंबर के कुछ निर्देशों को बरकरार रखा। ये निर्देश भाजपा उम्मीदवार के एस मंजुनाथ गौड़ा की याचिका पर दिए गए थे, जिन्होंने नंजेगौड़ा के खिलाफ चुनाव लड़ा था और वोटों की गिनती में गड़बड़ी का आरोप लगाया था।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगाई जाती है, जिसमें नंजेगौड़ा का चुनाव रद्द किया गया था। इसके चलते वह विधायक बने रहेंगे। हालांकि, कोर्ट ने चुनाव आयोग को हाईकोर्ट के उस निर्देश का पालन करने को कहा जिसमें वोटों की दोबारा गणना की बात कही गई थी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मतगणना के बाद बिना कोर्ट की अनुमति के कोई परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा उम्मीदवार मंजुनाथ गौड़ा की याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। नंजेगौड़ा ने 2023 के चुनाव में मंजुनाथ को महज 248 वोटों से हराया था।

नंजेगौड़ा की तरफ से पेश वरिष्ठ वकीलअभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हाईकोर्ट ने सात मुद्दे तय किए, लेकिन किसी पर फैसला नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने वीडियो रिकॉर्डिंग के न होने को आधार बनाकर निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ गलत निष्कर्ष निकाला, जबकि वह पक्षकार भी नहीं थे।
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भाजपा उम्मीदवार मंजुनाथ गौड़ा की तरफ से वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने जवाब देते हुए कहा कि मामला केवल वीडियो रिकॉर्डिंग का नहीं है, बल्कि वोटों की गिनती में अनियमितताओं का है। अब कोर्ट ने मंजुनाथ गौड़ा से 24 नवंबर तक जवाब मांगा है।

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