एससी-एसटी एक्ट पर
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से मचे सियासी बवाल के बीच केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले ने गुरूवार को
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की। उन्होंने शाह के समक्ष पूरे विस्तार से मामले को रखा। इसके बाद शाह ने केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद को फोन कर उन्हें मामले का समाधान निकालने को कहा है। शाह से मुलाकात के बाद इस आशय की जानकारी खुद अठावले ने मीडिया को दी है। इस बीच कांग्रेस ने भाजपा सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकारी वकील ने सर्वोच्च न्यायालय में सही तरीके से पैरवी नहीं की है।
दरअसल एससी-एसटी एक्ट पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि इस एक्ट के तहत तत्काल कार्रवाई नहीं होगी। न्यायालय का फैसला इस आधार पर आया है कि एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज अधिकतर मामले फर्जी होते हैं और एक्ट का सहारा लेकर निर्दोश लोगों को फंसाया जाता है। बताया जा रहा है कि आगामी लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने मोदी सरकार के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के मामले को बड़ा मुद्दा बनाने का निर्णय लिया है। यही वजह है कि सरकार के रणनीतिकार भी मामले पर सक्रिय हो गए हैं।
सरकार के सामने भी सियासी मजबूरी है कि ऐन चुनावी वर्ष में वह इतने बड़े वोट बैंक को सीधे अपने खिलाफ नहीं कर सकती है। पार्टी के भीतर के सांसदों और मंत्रियों में भी इस बात को लेकर चिंता बनी है। एससी और एसटी के लिए आरक्षित लोकसभा की सर्वाधिक सीटों से भाजपा के सांसद है। यही वजह है कि पुनर्विचार याचिका दायर कर सरकार न सिर्फ विपक्ष के सियासी वार को कमजोर करना चाहती है।
बल्कि अपना आधार भी बचाए रखना चाह रही है। इस बीच सरकार के अपने मंत्रियों ने भी सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की है। हालांकि पासवान और अठावले सरीखे मंत्रियों के सुर नरम नजर आ रहे हैं। बल्कि पासवान ने लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने के मामले को लेकर कांग्रेस को आड़े हाथ लिया है। इससे भी यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय में मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी।