सार
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात शिक्षा अधिनियम में 2021 के संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने की सहमति दी। इस संशोधन से राज्य को अल्पसंख्यक स्कूलों में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की भर्ती के नियम बनाने की अनुमति मिल गई थी। कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया, लेकिन संशोधन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा (जीएसएचएसई) अधिनियम में 2021 के संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका की जांच करने पर सहमति जताई है। इस संशोधन से राज्य को भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यक स्कूलों में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की भर्ती के लिए नियम बनाने की अनुमति मिल गई थी।
कोर्ट ने राज्य सरकार को भेजा नोटिस
बता दें कि मामले में सुनवाई के दौरान न्यायामूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया, लेकिन संशोधन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वह दूसरे पक्ष को सुने बिना कोई आदेश नहीं दे सकती।
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याचिकाकर्ता के वकील का तर्क
वहीं मामले में याचिकाकर्ता, सेंट जेवियर्स हाई स्कूल और अन्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सीयू सिंह ने कहा कि उच्च न्यायालय का फैसला सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व के फैसलों का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार न्यूनतम मानदंड और योग्यता मानक निर्धारित कर सकती है, लेकिन यह प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की नियुक्ति को नियंत्रित नहीं कर सकती। इसपर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि उच्च न्यायालय का निष्कर्ष यह था कि चयन समिति या कार्यकारी समिति में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों का वर्चस्व होना चाहिए।
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गौरतलब है कि बीते 23 जनवरी को गुजरात उच्च न्यायालय ने जीएसएचएसई अधिनियम में 2021 के संशोधनों को बरकरार रखते हुए कहा था कि राज्य को नियम बनाने की शक्ति संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक संस्थानों को दी गई सुरक्षा का उल्लंघन नहीं करती है।