सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय से साइप्रस में ठिकाने लगाए गए यूनिटेक के घर खरीदारों के 5000 करोड़ रुपये वापस लाने के लिए उठाए गए कदमों की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। साथ ही शीर्ष अदालत ने यूनिटेक की परियोजना भूमि संपत्ति और गैर-परियोजना भूमि संपत्ति के मुद्रीकरण की नीति और मानक संचालन प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एएम सप्रे को सौंपी।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह ने ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल माधवी दीवान से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर यह भी बताने को कहा कि यूनिटेक की अटैच की गई संपत्ति से पैसे जुटाने के लिए क्या क्या कदम उठाए जा सकते हैं। ताकि इस पैसे से रुकी हुई परियोजनाओं का निर्माण पूरा किया जा सके।
दीवान ने पीठ को बताया, चूंकि यूनिटेक के नए प्रबंधन बोर्ड ने आर्थिक संकट को उजागर किया है। यूनिटेक की अब तक अटैच की गई संपत्ति को अदालत के निर्देश पर बेचकर धन जुटाया जा सकता है। ये संपत्ति आपराधिक आय से जुटाई गई थी और इसकी मूल कीमत 380 करोड़ रुपये और बाजार मूल्य 1000 करोड़ रुपये है।
इस पर पीठ ने कहा, हम विशेष मनी लॉन्ड्रिंग अदालत के क्षेत्राधिकार में दखल नहीं दे सकते। हम केवल इस मामले की सुनवाई को गति देने का निर्देश दे सकते हैं। हमें कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। हम इस तरह इन संपत्तियों को बेच नहीं सकते, न ही यह पूर्वानुमान लगा सकते हैं कि ये संपत्तियां आपराधिक आय हैं।
पीठ ने इसके लिए दीवान को मनी लॉन्ड्रिंग अदालत का रुख करने को कहा। पीठ ने कहा, इन संपत्तियों को कानून के आधार पर अटैच किया गया है और आगे भी कानूनी प्रक्रिया को मानना होगा।