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श्री कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह मामला: सुप्रीम कोर्ट का सर्वेक्षण की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार, कही यह बात

Fri, 22 Sep 2023 07:40 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उच्चतम न्यायालय (एससी) ने शुक्रवार को श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें मथुरा में जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण करने की मांग की गई थी, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि यह पहले से मौजूद हिंदू मंदिर पर बनाया गया था या नहीं।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उच्चतम न्यायालय (एससी) ने शुक्रवार को श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें मथुरा में जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण करने की मांग की गई थी, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि यह पहले से मौजूद हिंदू मंदिर पर बनाया गया था या नहीं।

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शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 10 जुलाई के फैसले को चुनौती देने वाली अपील को खारिज कर दिया, जिसने मथुरा के एक दीवानी न्यायाधीश के आदेश में कोई त्रुटि या अवैधता न पाते हुए याचिका को खारिज कर दिया था, जिन्होंने मस्जिद की प्रबंधन समिति द्वारा उठाए गए मुकदमे की विचारणीयता के मुद्दे पर पहले सुनवाई करने का फैसला किया था।

ट्रस्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसने मथुरा के दीवानी न्यायाधीश को मुकदमे के खिलाफ उठाई गई आपत्तियों पर फैसला करने से पहले कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के लिए उसके आवेदन पर फैसला करने का निर्देश देने की उसकी याचिका खारिज कर दी थी।
 

मस्जिद की प्रबंधन समिति और उत्तर प्रदेश सुन्नी केंद्रीय वक्फ बोर्ड द्वारा दीवानी न्यायाधीश के समक्ष मुकदमे के खिलाफ आपत्तियां उठाई गई थीं। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा, 'हमें लगता है कि हमें संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि बड़े पैमाने पर कई मुद्दे उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित हैं।'
 

ट्रस्ट का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता गौरव भाटिया ने शीर्ष अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया कि निचली अदालत के मार्च के आदेश से व्यथित होकर, उन्होंने उच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर की, जिसने 26 मई को मामले से संबंधित सभी मुकदमों को अपने पास स्थानांतरित कर दिया।
 
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पीठ ने कहा कि वह इस तथ्य से अवगत है कि मुकदमों सहित सभी संबंधित कार्यवाही उच्च न्यायालय को स्थानांतरित कर दी गई है। हालांकि, निचली अदालत ने इस तरह के स्थानांतरण से पहले आदेश पारित किया और यह नहीं कहा जा सकता है कि उसके पास इस तरह का आदेश पारित करने का अधिकार नहीं था।
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