सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को धारा 375 के लिए दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिका में बलात्कार के कानून को खत्म करने की मांग की गई थी।
भारतीय दंड संहिता की धारा 375 में केवल पुरुष द्वारा महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाओं के बारे में कहा गया है। एक तरह से इस धारा में बलात्कार की परिभाषा बताई गई है। कि कौन सी परिस्थियों में कौन सी घटनाओं को बलात्कार माना जाएगा।
याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, क्योंकि मामला कानून से संबंधित है, इसलिए हम इसमें दखल देने के इच्छुक नहीं हैं। और इस मामले में दखल देने का यह सही स्टेज नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस एसके कॉल ने कहा, 'क्यों पुरुषों के बलात्कार के लिए महिलाओं को भी दोषी नहीं ठहराया जाता, और किसी पुरुष को दूसरे पुरुष के बलात्कार के लिए दोषी क्यों नहीं ठहराया जा सकता।'
बता दें यौन शोषण का ये कानून साल 2013 में ही संशोधित किया गया था। इस कानून में रेप की परिभाषा बताई गई है लेकिन ट्रांसजेंडर और पुरुषों को पीड़ित के तौर पर कानून में शामिल करने के लिए कोई बदलाव नहीं हुआ है।